Seraikela (Bhagya Sagar Singh) : जिले के किसानों को प्रकृति ने इस वर्ष आषाढ़ माह में खेती कार्य प्रारम्भ कराने का अवसर तो दिया लेकिन सावन भर पानी की बूंदों के लिये जम कर रुलाया. न धान की रोपनी हो सकी और न ही क्षेत्रवार होनेवाले मक्का, दलहन एवं तिलहन की खेती ससमय की जा सकी. अंतिम सावन से भादो में समय-समय पर हुए मूसलाधार बारिश पर भी किसानों ने नई उम्मीद के साथ खेतों की रोपाई की है. किसानों की मानें तो खेती किसानी में फसल की उत्पादकता में समय की ही विशेष महत्ता रहती है.
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: गिरफ्तारी के बाद ईडी ऑफिस में हुआ प्रेम प्रकाश का मेडिकल, सदर अस्पताल से पहुंची थी टीम 68997 हेक्टेयर में ही हुई है धान की रोपनी
जिला कृषि विभाग में उपलब्ध आंकड़ों की मानें तो अब तक जिले में लक्ष्य 143880 हेक्टेयर के विरुद्ध 107432 हेक्टेयर में विविध प्रकार के खेती आच्छादित हुई है. जिसके तहत एक लाख हेक्टेयर के विरुद्ध 68997 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई है. जिसमे हाइब्रिड 16205 हेक्टेयर में, अत्यंत उपजशील 25820 हेक्टेयर में एवं उन्नत धान 26972 हेक्टेयर में हुई है. मक्का की खेती का लक्ष्य 6900 के विरुद्ध 6858 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ है जिसके तहत हाइब्रिड 1185 हेक्टेयर में, अति उपजशील 3896 हेक्टेयर में एवं उन्नत किस्म का 1777 हेक्टेयर में आच्छादन किया गया है.
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: उद्योग सचिव और जियाडा के एमडी उद्यमियों को करेंगे संबोधित दाल व तिल की खेती पर दिया जा रहा ध्यान
दलहन का लक्ष्य 34600 हेक्टेयर के विरुद्ध 30747 हेक्टेयर में हुआ है. जिसके तहत अरहर 10687 हेक्टेयर में, उरद 9798 हेक्टेयर में, मूंग 6230 हेक्टेयर में कुल्थी 1986 हेक्टेयर में एवं अन्य दलहन 2046 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ है. तिलहन 1390 हेक्टेयर के विरुद्ध 710 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ है. जिसके तहत मूंगफली 397 हेक्टेयर में, तिल 73 हेक्टेयर में, सोयाबीन 185 हेक्टेयर में, सूर्यमुखी 55 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ है. [wpse_comments_template]
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