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‘शुभम संदेश’ पड़ताल : स्कूल की बाउंड्री निर्माण में भ्रष्टाचार, 12 एमएम की जगह लगा दिया 10 एमएम का छड़

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  • सरकारी स्कूल की बाउंड्री के लिए इंजीनियर ने12एमएम की छड़ और एक नंबर ईंट लगाने के लिए तैयार किया था प्राक्कलन
  • एक नंबर की जगह तीन नंबर की ईंट का किया उपयोग
Umesh Kumar Hazaribagh : एक ओर सरकारी विभिन्न महत्वकांक्षी योजना के जरिये राज्य में विकास की गंगा बहाने की बात करती है. दूसरी और इंजीनियर और ठेकेदार मिलीभगत कर सरकार को चूना लगाने में मशगूल दिख रहे हैं. विभागीय इंजीनियर जब किसी भवन या चहारदीवारी का प्राक्कलन बनाते हैं, तो पूरी मजबूती के साथ कार्य की रूपरेखा सरकार को दिखाते हैं. इस आधार पर उक्त योजना का टेंडर भी स्वीकृत कर दिया जाता है. लेकिन, कागज पर जो प्राक्कलन बनता है, ठीक उसके उलट धरातल पर कार्य को उतारा जाता है. दरअसल मामला इचाक प्रखंड के तिलरा कवातू स्थित उत्क्रमित प्लस टू हाई स्कूल का है. इस स्कूल में चहारदीवारी, शौचालय और पेवर्स ब्लॉक बिछाने के लिए ग्रामीण विकास प्रमंडल हजारीबाग के द्वारा पांच माह पूर्व टेंडर हुआ था. इंजीनियर द्वारा बनाए गए प्राक्कलन के अनुसार पिलर के लिए 12 एमएम का छड़, एक नंबर ईंट और बढ़िया सीमेंट का उपयोग करना था. लेकिन, जब धरातल पर ठेकेदार द्वारा कार्य शुरू किया गया, तो प्राक्कलन रूपरेखा को नजरअंदाज कर दिया गया. अधिकारी की मिलीभगत से नया प्राक्कलन बनाकर काम शुरू कर दिया. 10 एमएम का छड़, दो-तीन नंबर ईंट और निम्न गुणवत्ता वाले सस्ता सीमेंट लगाकर चहारदीवारी बना दी गई. निजी चहारदीवारी को निर्माण कार्य में दिखा रहे ठेकेदार : यहां तक कि स्कूल के निकट ही गांव के ही सतन राणा की निजी बाउंड्री है जो 20 वर्ष पहले की गई थी, ठेकेदार ने 40 फीट लंबी इस चहारदीवारी में रिपेयरिंग करवा कर दिखा दिया. इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने ग्रामीण विकास प्रमंडल के इंजीनियर और ठेकेदार पर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि जिस वक्त विभाग के द्वारा टेंडर हुआ था, उस वक्त काम शहर की एक कंपनी को दिया गया था. लेकिन कंपनी ने गांव के ही करीब 10 दबंग लोगों के पास कमीशन लेकर पेटी पर ठेका दे दिया, जिसमें एक मुखिया पति भी शामिल है. ऐसे में ग्रामीण अगर खुल कर विरोध करते हैं, तो गांव में मारपीट से लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

ऑफिस में बैठ कर काम देख रहे इंजीनियर

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर विभाग के आला अधिकारियों द्वारा निर्माण स्थल पहुंच कर पर काम का जायजा लिया जाता, तो शायद ठेकेदार ऐसा घटिया काम नहीं करता. लेकिन विभाग और इंजीनियर साहब अपने ही ऑफिस में बैठ कर सारा काम देख रहे थे और स्थलीय निरीक्षण करना मुनासीब नहीं समझे. ऐसे में स्कूल की चहारदीवारी मजबूत नहीं बनी और भविष्य में कभी भी धरासाई हो सकती है. ऐसे में बच्चों के साथ कोई हादसा हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर 10 एमएम का छड़ लगा कर ही चहारदीवारी मजबूत बन गई, तो फिर इंजीनियर ने 12 एमएम का छड़ लगाने का प्राक्कलन क्यों बनाया था. यहां साफ तौर पर सरकार को गुमराह करने जैसा है, अन्यथा विभाग इस मसले पर ठोस कदम जरूर उठाता.

अनियमितता की मिली है जानकारी : इंजीनियर

इस संबंध में ग्रामीण विकास प्रमंडल विभाग के इंजीनियर धनंजय कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में अनियमितता की जानकारी मिली है. ठेकेदार निजी व्यक्ति की 40 फीट लंबी चहारदीवारी को अपना कार्य बता रहे हैं. विभाग के द्वारा ठेकेदार को इसका भुगतान नहीं मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि प्राक्कलन में जो छड़ लगाने को कहा गया था, अगर उस गुणवत्ता से कमतर छड़ लगाया गया है, तो उसका भुगतान भी काट कर किया जाएगा. वहीं, इस संबंध में संबंधित ठेकेदार के मोबाइल पर फोन किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया. इसे भी पढ़ें : सीएम">https://lagatar.in/if-cm-is-not-answering-today-he-will-have-to-answer-tomorrow-governor/">सीएम

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