Lagatar Desk
उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान अधिकारियों से 85,854 वोटर्स के नाम बिना किसी कारण के हटा दिए गए. यह काम सॉफ्टवेयर ने किया. नाम हटाने के पीछे कोई कारण नहीं बताये गए. जबकि कानून कहता है कि नाम हटाने से पहले कारण बताना अनिवार्य है.
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह माना है कि दावे और आपत्तियों के समय, चुनाव अधिकारियों की ओर से ही नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध आए.
सवाल उठने लगे हैं
- *इन खुलासों के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि चुनाव आयोग पर विश्वास कैसे किया जाये?
- *क्या विपक्ष के आरोपों में दम है, जिसमें यह कहा जाता रहा है कि चुनाव आयोग वोटों को मैनेज कर रहा है?
- *अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट और आयोग की निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में आयेगा.
'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' ने अपनी जांच में पाया कि चुनाव अधिकारियों के अनुरोधों में से 20 प्रतिशत सीधे ECI के विधानसभा-स्तर के अधिकारियों ने ही जमा किए थे. हालांकि, अधिकारियों ने ये फॉर्म खुद नहीं भरे.
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जब अधिकारी वोटरों के नाम हटाते थे, तो ECI का सॉफ्टवेयर 'ERONET' अपने-आप ये फॉर्म जेनेरेट कर देता था. इन ऑटो-जेनरेटेड फॉर्म में अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर पहले से ही होते थे.
इस तरह जिन अधिकारियों का काम, नाम हटाने वाले दावों पर फैसला करना था, वे खुद ही जज भी थे और खुद ही शिकायतकर्ता भी. समय-सीमा खत्म होने के बाद भी वोटर्स का नाम हटाने के 1,10,476 आवेदन जमा किए गए और ECI ने उन्हें मंजूर भी कर लिया.
अब 'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' ने दावा किया है कि यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जो प्रतिक्रिया दी है, उससे इस बात की पुष्टि होती है कि ECI के सॉफ्टवेयर ने UP में चुनाव अधिकारियों को बिना कोई कारण बताए वोटरों के नाम हटाने के लिए 85,854 फ़ॉर्म पर साइन करने के लिए मजबूर किया.
चुनाव आयोग ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि ऑटो-जेनरेटेड फ़ॉर्म में वोटरों के नाम हटाने का कोई कारण क्यों नहीं बताया गया? उन्होंने यह भी नहीं बताया कि कुछ फार्म में वोटरों को हटाने के कारण की जगह सिर्फ "A", "N", "H" या "E" जैसे एक अक्षर क्यों लिखे गए थे?
प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी ने रिपोर्टर्स कलेक्टिव के उस दावे को भी स्वीकार किया है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की 200 से ज्यादा कोशिशें की गईं. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर नाम हटाने वाले आवेदनों की संख्या 4,700 के आसपास थी.

