Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

दुमका में सीता की अग्निपरीक्षा...तीन खेमों में बंटी भाजपा को एकजुट रखने की होगी बड़ी चुनौती

Satyasharan Mishra Ranchi : दुमका लोकसभा सीट पर इस बार सीता की अग्निपरीक्षा है. भाजपा ने अपने पहले से घोषित प्रत्याशी सुनील सोरेन को वापस कर सीता सोरेन को चुनाव में उतारा है. सोरेन परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन ने झामुमो से बगावत कर भाजपा का झंडा थामा और चुनावी समर में कूद चुकी हैं, लेकिन वहां उनकी राह उतनी भी आसान नजर नहीं आती. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनील सोरेन का टिकट वापस लेना भाजपा के लिए आत्मघाती निर्णय साबित हो सकता है. सुनील सोरेन ने भले ही भाजपा आलाकमान के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन अंदर से नेतृत्व के इस फैसले से खफा हैं. उनके समर्थक भी इसे पचा नहीं पा रहे हैं. भाजपा का एक बड़ा तबका ऊपर-ऊपर भले ही आलाकमान के निर्णय का मुखर होकर विरोध तो नहीं कर रहा, लेकिन अंदर-अंदर इसलिए खफा है कि ऐन चुनाव के वक्त चिरप्रतिद्वंद्वी झामुमो से बॉरो प्लेयर लाकर उतार दिया. ऐसे में प्रतिद्वंद्वी झामुमो प्रत्याशी (जिसकी अभी घोषणा नहीं हुई है) के साथ ही साथ निवर्तमान सांसद सुनील सोरेन सहित भाजपा के नाराज तबके को साध पाने की चुनौतियों का भी सामना सीता को करना पड़ सकता है.

सीता को प्रत्याशी बनाते ही भाजपा तीन खेमे में बंट गई

सीता सोरेन के नाम की घोषणा होने से पहले तक दुमका में भाजपा दो गुटों में बंटी हुई थी. एक खेमा सांसद सुनील सोरेन का, वहीं दूसरा खेमा झारखंड सरकार में मंत्री और दुमका से विधायक रहीं लुईस मरांडी का था. लेकिन सीता के आने के बाद अब दुमका में भाजपा तीन खेमों में बंट चुकी है. लुईस मरांडी सोरेन परिवार की घोर विरोधी रही हैं. लुईस के पास अपना एक बड़ा वोटबैंक है.आदिवासी के साथ-साथ मिशनरी वोटरों पर भी उनकी अच्छी पकड़ है. मतदान से पहले सीता को सुनील सोरेन और लुईस मरांडी को अपने पक्ष में हर हाल में करना होगा. इसमें वे सफल रहीं, तो भाजपा के वोटों का बिखराव नहीं होगा, लेकिन भितरघात हुआ तो भाजपा के लिए सीट बचाने की चुनौती होगी. वैसे सबकुछ इस बात पर भी निर्भर करेगी कि झामुमो आखिर इस सीट से किसे प्रत्याशी बनाता है.

दुमका लोकसभा सीट पर झामुमो ने लंबी पारी खेली है

दुमका लोकसभा सीट पर झामुमो ने लंबी पारी खेली है. 1980 से इस सीट पर सोरेन परिवार का दबदबा रहा है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन यहां से अबतक 8 बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. शिबू सोरेन के राजनीतिक शिष्य रहे सुनील सोरेन झामुमो से बगावत कर 2009 से 2019 तक हुए तीन चुनावों में शिबू सोरेन को ही चुनौती देते रहे. 2019 में सुनील सोरेन आखिरकार शिबू सोरेन को हराने में कामयाब रहे. इसका इनाम भाजपा ने उन्हें 2024 के लिए टिकट देकर दिया, लेकिन सीता के भाजपा का दामन थामते ही सुनील का इनाम वापस ले लिया.

दुमका में भाजपा से सीता के आने से झामुमो की बेचैनी भी बढ़ी

भाजपा से अब सीता सोरेन के चुनाव लड़ने से दुमका को लेकर झामुमो की भी बेचैनी बढ़ गयी है. पार्टी अबतक यह फैसला नहीं ले पाई है कि सीता सोरेन के खिलाफ चुनाव में किसे उतारा जाए, जो आसानी से अपना गढ़ बचा सके. सीता सोरेन के मैदान में आने के बाद झामुमो के लिए यह सीट जीतना प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है. झामुमो अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए सोच-समझ कर कैंडिडेट उतारेगा. सीट पर दबदबा कायम रखने के लिए झामुमो की यह कोशिश होगी कि परिवार का ही कोई व्यक्ति बड़ी बहू के खिलाफ चुनाव लड़े, क्योंकि अगर किसी दूसरे नेता को चुनाव में उतारा जाता है, तो राह आसान नहीं होगी. अब देखना है कि बड़ी बहू के खिलाफ परिवार का कौन सा सदस्य चुनाव लड़ता है. इसे भी पढ़ें : पलामू">https://lagatar.in/palamu-two-including-former-congress-leader-shot-dead-in-chainpur/">पलामू

: चैनपुर में गोली मारकर पूर्व कांग्रेस नेता समेत दो की हत्या
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही