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तो बिना एग्जाम दिये 12वीं पास कर जायेंगे शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो!

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बीमारी के कारण रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके मंत्री

Ranchi:कोविड 19 महामारी के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गयी है. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी एलान कर दिया है कि वह महामारी को देखते हुए 12वीं की परीक्षा नहीं लेगी. कर्नाटक में भी परीक्षा रद्द करने पर विचार चल रहा है. कई अन्य राज्यों में भी 12वीं की परीक्षा रद्द करने की मांग उठ रही है. अगर इसी तर्ज पर झारखंड में भी 12वीं की परीक्षा रद्द होती है, तो झारखंड के 12वीं के छात्रों के साथ-साथ यहां के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो भी बिना परीक्षा दिये 12वीं की परीक्षा पास कर जाते. लेकिन ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि शिक्षा मंत्री अपनी बीमारी की वजह से 12वीं का रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म नहीं भर सके. जगन्नाथ महतो फिलहाल चेन्नई में हैं. वे वहां अपोलो अस्पताल में अपने फेफड़ों के प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. 25 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है.

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पिछले साल खुद के स्थापित कॉलेज में लिया था दाखिला

उल्लेखनीय है कि 2020 में शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने बोकारो जिले के नावाडीह में स्वयं द्वारा स्थापित देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय में इंटर में अपना नामांकन कराया था. कॉलेज के प्राचार्य दिनेश प्रसाद ने बताया कि शिक्षा मंत्री को इस वर्ष इंटर की परीक्षा देनी थी, लेकिन बीमारी की वजह से न तो वह रजिस्ट्रेशन फार्म भर सके और न ही परीक्षा फॉर्म. इस कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे. अगर मंत्री ने ये फॉर्म भर दिये होते तो परीक्षा रद्द होने की स्थिति में वे 12वीं पास कर जाते.

पिछले साल दाखिला लिया था शिक्षा मंत्री ने

दरअसल 2019 में हेमंत सोरेन सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री बनाये गये जगन्नाथ महतो की शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक पास थी. उस समय उनकी शिक्षा को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाये रहे थे. इसे देखते हुए मैट्रिक पास शिक्षा मंत्री ने अपनी योग्यता बढ़ाने की ठानी और देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय नावाडीह में इंटर में अपना नामांकन कराया. मंत्री स्वयं इंटर कॉलेज के फीस काउंटर पहुंचे थे और इंटरमीडिएट में नामांकन कराने के लिए शुल्क के रूप में ग्यारह सौ रुपये जमा कर रसीद कटाई थी. दाखिला लेते वक्त मंत्री ने कहा था कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है. उन्हें आगे नहीं पढ़ पाने की कसक थी, अब वह कसक दूर करेंगे.

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