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... कोई तो बचाए इन आवारा कुत्तों से

गर्मी हो या बरसात आवारा कुत्तों से बचना आसान नहीं हैं. राजधानी के जिस गली या चौराहे में जाएं, वहां आवारा कुत्तों के आतंक का नजारा दिख ही जाएगा. अगर सावधानी न बरती, तो डॉग बाइट का शिकार होना तय ही है.पशु चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी में भोजन पानी की तलाश में कुत्ते अधिक चिड़चिड़ा होकर आक्रामक हो जाते हैं. वहीं बरसात में कुत्तों का प्रजनन काल होने के कारण वे अधिक आक्रमक हो जाते हैं.
 
  • सालभर में 20 हजार लोगों को काट कर पूरा करते हैं अपना कोटा
  • नगर निगम और पशु कल्याण संगठन भी जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं
  • विधानसभा में भी उठ चुका है डॉग बाइट का मामला, पर सब हैं मौन

Ranchi :  गर्मी हो या बरसात आवारा कुत्तों से बचना आसान नहीं हैं. राजधानी के जिस गली या चौराहे में जाएं, वहां आवारा कुत्तों के आतंक का नजारा दिख ही जाएगा. अगर सावधानी न बरती, तो डॉग बाइट का शिकार होना तय ही है.पशु चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी में भोजन पानी की तलाश में कुत्ते अधिक चिड़चिड़ा होकर आक्रामक हो जाते हैं. वहीं बरसात में कुत्तों का प्रजनन काल होने के कारण वे अधिक आक्रमक हो जाते हैं.

 

 


 
इन इलाकों में अधिकांश डॉग बाइट के मामले


राजधानी रांची में हर गली चौराहों में कुत्तों का आतंक है. रिम्स परिसर, बहुबाजार, कोकर, बर्द्धमान कंपाउंड, मोरहाबादी, तुपुदाना, सुखदेव नगर, हरमू, कर्बला चौक, हिंदपीढ़ी, सेवा सदन के आस-पास का इलाका, धुर्वा जेपी मार्केट, टंकी साइड, सहित अन्य इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक है. 

 

सालाना 20 हजार लोगों को काट कर बनाते हैं रिकॉर्ड


आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर है कि वे सालाना लगभग 20 हजार लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. पिछले साल लगभग 20 हजार लोग डॉग बाइट के शिकार हुए थे. इस साल यानि 2025 में 29 जुलाई तक कुत्तों ने लगभग 13 हजार लोगों को अपना शिकार बनाया है. जनवरी में 2083, फरवरी में 1845, मार्च में 1982, अप्रैल में 1980, मई में 2066, जून में 1680 और जुलाई में 1320 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए हैं. इस मामले में नगर निगम और पशु कल्याण संगठन भी अपनी जिम्मेवारी से मुंह फेर रहे हैं. 

 

विधानसभा में भी उठ चुका है मामला


विधानसभा में भी यह मामला उठ चुका है. तत्कालीन विधायक बिरंची नारायण ने इस मामले को सदन में उठाया था. इस कई सदस्यों ने डॉग बाइट के मामले पर काबू पाने के लिए नागालैंड से लोगों को बुलाने की वकालत भी की थी. इस पर बयान पर सदन में विवाद भी हुआ था.

 

आवारा कुत्तों के काटने पर कोई कानूनी प्रावधान नहीं


आवारा कुत्तों के काटने पर अब तक कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. जबकि पालतू कुत्तों के काटने से मौत होने पर मालिक पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. जिसमें दो से 10 साल के सजा का प्रावधान है. वहीं यदि कोई व्यक्ति पालतू कुत्ते को मारता है तो उसके खिलाफ जुर्माना या दो साल तक की सजा हो सकती है.

 

 

 

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