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विशेष ऑडिट में VC दिनेश सिंह के चहेते संजय सिंह सहित अन्य से वसूली की अनुशंसा

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में हुए विशेष ऑडिट रिपोर्ट में VC दिनेश सिंह सहित अन्य से वसूली की अनुशंसा की गयी है. गलत वेतन निर्धारण से इन लोगों ने वास्तविक वेतन से अधिक राशि ली है. लेकिन VC दिनेश सिंह ने इस वसूली पर अब तक सहमति नहीं दी है. VC ने अपने ही स्तर से सिंडिकेट के फैसले को बदल कर संजय सिंह को मुख्यालय में पदस्थापित किया है.
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Ranchi :  नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में हुए विशेष ऑडिट रिपोर्ट में VC दिनेश सिंह सहित अन्य से वसूली की अनुशंसा की गयी है. गलत वेतन निर्धारण से इन लोगों ने वास्तविक वेतन से अधिक राशि ली है. लेकिन VC दिनेश सिंह ने इस वसूली पर अब तक सहमति नहीं दी है. VC ने अपने ही स्तर से सिंडिकेट के फैसले को बदल कर संजय सिंह को मुख्यालय में पदस्थापित किया है.

 

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के VC दिनेश सिंह पर सामग्रियों की खरीद व अन्य मामलों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. राज्यपाल ने इन आरोपों के मद्देनजर विश्वविद्यालय में विशेष ऑडिट कराने का निर्देश दिया था. राज्यपाल के आदेश के आलोक में वित्त विभाग द्वारा विश्वविद्यालय का ऑडिट कराया गया.

 

वित्त विभाग की टीम ने ऑडिट रिपोर्ट भी सौंप दी है. इसमें कई तरह की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. ऐसे में अब कुलपति के चहेते संजय कुमार सिंह के अलावा राजीव मुखर्जी, वेद प्रकाश शुक्ला और संतोष कुमार द्वारा वेतन मद में ली गयी अतिरिक्त राशि की वसूली की अनुशंसा की गयी है.

 

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, संजय कुमार सिंह ने जनवरी 2012 से जून 2019 तक वेतन मद से 4.50 लाख रुपये अधिक लिये हैं. राजीव मुखर्जी ने भी इसी अवधि में 3.41 लाख और वेद प्रकाश शुक्ला ने 4.95 लाख रुपये अधिक लिये हैं. इसके अलावा संतोष कुमार ने वेतन के रूप में 6.76 लाख रुपये अधिक लिया है.

 

ऑडिट रिपोर्ट में इस राशि की वसूली के लिए वित्त सलाहकार को जिम्मेवार माना गया है. यानी वसूली की कार्रवाई वित्त सलाहकार द्वारा पूरी की जानी है.

 

 

उल्लेखनीय है कि संतोष कुमार सेवानिवृत हो चुके हैं. उनके द्वारा ली गयी अधिक राशि की वसूली की जा चुकी है. लेकिन संजय सिंह, राजीव मुखर्जी और वेद प्रकाश शुक्ला से राशि की वसूली नहीं हो सकी है. संजय सिंह सहित अन्य से राशि की वसूली के लिए प्रस्ताव बना कर VC दिनेश सिंह के पास भेजा गया था.

 

लेकिन उन्होंने वसूली के प्रस्ताव पर अब तक सहमति नहीं दी है. बताया जाता है कि उन्होंने वसूली के प्रस्ताव से जुड़ी फाइल को बगैर किसी सहमति या अपत्ति के ही लौटा दिया है. इससे वसूली की कार्रवाई संभव नहीं हो पा रहा है.

 

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