Lagatar Desk: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील याचिका दायर किया था. जिसमें विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई थी. इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने WFI की ओर से अपील को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस अपील को खारिज करने का मतलब ये नहीं है कि हाईकोर्ट ने कुश्ती महासंघ के खिलाफ जो टिप्पणी की थी वो सही है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला अब बेमानी हो चुका है क्योंकि सिलेक्शन ट्रायल्स पहले ही हो चुके हैं, जिनमें विनेश फोगाट ट्रायल्यस में शामिल हुई और वह हार गईं. सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती महासंघ के वकील के उस अर्जी को नामंजूर कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट की आलोचनात्मक टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की गई थी.
दरअसल, इस मामले में हाईकोर्ट ने यह माना था कि कुश्ती महासंघ की चयन नीति (25 फरवरी की) और उसके बाद जारी चयन मानदंडों से जुड़ा सर्कुलर (6 मई का) साफ तौर पर भेदभाव को दिखाते थे. हाईकोर्ट ने महासंघ कि इस नीति की आलोचना की कि इसमें विनेश फोगाट जैसी दिग्गज एथलीटों को अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं दिया गया था. जो मातृत्व अवकाश के तहत लंबी छुट्टी पर थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले को जिस तरीके से निपटाया वो सही नहीं था. हाईकोर्ट ने पूरे मामले को विनेश फोगाट की मैटरनिटी लीव से जोड़ दिया. हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के सामने सवाल यह था कि एशियन गेम्स की शर्तें कितनी कानूनी और वैध हैं. जिनकी घोषणा 25 फरवरी 2026 को की गई थी. इसमें किसी को 4 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जरूरी था.
साथ ही सर्वोच्च कोर्ट ने कहा कि ये नियम सभी पर समान रूप से लागू होते थे. हैरानी की बात यह है कि बिना किसी योजना किसी नियम या किसी भी चीज का जिक्र किए अचानक हाईकोर्ट का यह कह देना कि यह नीति भेदभावपूर्ण है. यह नीति काफी पहले फरवरी 2026 में बनाई गई थी. यह सभी पर समान रूप से लागू होती थी.
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