Lagatar Desk : रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का अलॉटमेंट होने वाला है. इस बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 72865.79 के लेवल पर खुला, जो थोड़ी देर में 72576.56 के लेवल पर आ गया. इसी तरह निफ्टी भी 22501.15 के लेवल से गिरकर 22410.30 के स्तर पर पहुंच गया.
सुबह 9.24 मिनट पर सेंसेक्स 547.27 अंकों की गिरावट के साथ 72576.56 के लेवल पर ट्रेड करता नजर आया. इसी तरह निफ्टी 189.70 अंक फिसलकर 22410.30 के लेवल पर कारोबार करता दिखा. सोमवार के कारोबार बाजार में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स के केवल तीन शेयर हरे निशान पर नजर आ रहे हैं. बाकी बचे 27 शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं.
आज के टॉप गेनर की लिस्ट में कोटक महिंद्रा (2.18%), सनफार्मा (0.92%) और अडानी पोर्ट्स (0.59%) के शेयर शामिल हैं. इसी तरह टॉप लूजर की श्रेणी में एशियन पेंट्स (2.14%), बजाज फाइनें, (1.59%), एचयूएल (1.29%), इंफोसिस (1.49%) और एचसीएल टेक (0.72%) के शेयर शामिल हैं.
वहीं एसबीआई (1.00%), टाइटन (0.66%), बजाज फिनसर्व (0.48%), एनटीपीसी (0.69%), आईसीआईसीआई बैंक (0.68%), रिलायंस (0.52%), आईटीसी (1.07%), टेक महिंद्रा (0.42%), अल्ट्राटेक सीमेंट (0.54%), महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.07%), इटर्नल (0.71%) और पावर ग्रिड (0.57%) के शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं.
इसी तरह मारुति सुजुकी (0.26%), भारती एयरटेल (0.53%), भारत इलेक्ट्रॉनिक (0.95%),ट्रेंट (1.07%), इंटरग्लोब एविएशन (0.77%), लार्सन (0.32%), टाीसीएस (0.62%), एचडीएफसी बैंक (0.43%) और टाटा स्टील (0.27%) के शेय़रों में बिकवाली देखी जा रही है.
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शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हो सकते हैं. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मिड-कैप व स्मॉल-कैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार पर असर देखा जा रहा है. इसके अलावा कर्ज लेकर निवेश करने वाले लोगों की बढ़ती परेशानी और बाजार में डर का माहौल भी गिरावट को बढ़ा रहा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली : विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ता है और शेयरों की कीमतें गिर सकती हैं. इससे दूसरे निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित होता है.
रुपये की कमजोरी : भारतीय रुपये की कीमत में गिरावट आने से विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर डॉलर के हिसाब से कम रिटर्न मिल सकता है. इससे वे भारतीय बाजार में निवेश करने से बच सकते हैं या अपना पैसा निकाल सकते हैं. इसका असर शेयर बाजार पर पड़ता है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें : पश्चिम एशिया संकट के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. दरअसल भारत अपनी जरूरत का 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ने पर भारत को तेल आयात के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं. इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका शेयर बाजार पर भी असर देखने को मिल रहा है.
कमजोर कॉर्पोरेट नतीजे : दूसरी तिमाही (Q2) के दौरान कई प्रमुख कंपनियों और बड़े निजी बैंकों जैसे HDFC बैंक और एक्सिस बैंक के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिससे बैंकिंग और अन्य शेयरों में बिकवाली देखने को मिल रही है.

