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कोल्हान यूनिवर्सिटी का अजब कारनामा,पूछा सवाल – गोदी मीडिया से क्या समझते हैं?

Ranchi: झारखंड में एक तरफ क्वालिटी एजुकेशन देने की बात होती है, तो दूसरी तरफ राज्य के विश्वविद्यालय कंटरोवर्सी खड़ा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते. चुनाव का मौसम है. इसलिए विश्वविद्यालय के शिक्षक भी चुनावी रंग में रंग गए हैं. उनके दिलो-दिमाग में मीडिया में हो रही डिबेट बस गई है. वे विषयों के सिलेबस भी भूल गए हैं. ऐसा ही कारनामा कोल्हान यूनिवर्सिटी में हुआ है. कोल्हान यूनिर्सिटी में ग्रेजुएशन सेकेंड सेमेस्ट की परीक्षा ली गई. राजनीति विज्ञान में सवाल पूछा गया कि गोदी मीडिया से आप क्या समझते हैं? हांलाकि यह लघु उत्तरीय प्रश्न है. इस सवाल को देख छात्र भी कंफ्यूज रह गए. टीवी चैनलों पर इस मुद्दे पर बहस भी छिड़ी हुई है. इसे भी पढ़ें - भाजपा">https://lagatar.in/on-bjps-sanklp-patra-rahul-said-two-words-are-missing-in-it-inflation-and-unemployment-youth-will-not-fall-into-the-trap-of-modi/">भाजपा

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परीक्षा नियंत्रक ने साफ इंकार कर दिया

[caption id="attachment_873421" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/04/godi.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> ग्रेजुएशन सेकेंड सेमेस्ट की परीक्षा का प्रश्नपत्र[/caption] इस मसले पर शुभम संदेश ने कोल्हान यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक अजय चौधरी से बात की. तो परीक्षा नियंत्रक ने साफ कहा कि यह मेरे यूनिवर्सिटी का प्रश्न पत्र नहीं है. किसी में गलत तरीके से वायरल कर दिया है.

डीन एकेडमिक बोले, शिक्षक से बात करूंगा

कोल्हान यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक डॉ राजेंद्र भारती से जब इस मसले पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस पर शिक्षक से बात करूंगा. देखेंगे कि कहां मिस्टेक हुई. फिर पूछा गया कि यह यह सिलेबस का पार्ट है, तो उन्होंने कहा कि वैसे अर्बन नक्सलिज्म पर भी सवाल पूछे जाते हैं. फिर देखेंगे कि कहां मिस्टेक हुआ है. यह भी स्वीकार किया कि मेरे पास भी यह प्रश्न पत्र आया है.

क्या है गोदी मीडिया का अर्थ

"गोदी मीडिया" एक शब्द है, जिसका इस्तेमाल भारत में कुछ ऐसे मीडिया हाउस को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जिनके बारे में माना जाता है कि वे सरकार का अत्यधिक समर्थन करते हैं और अपने कवरेज में आलोचना नहीं करते हैं. "गोदी" शब्द हिंदी में "गोद" के लिए है और इसका उपयोग यह दर्शाने के लिए किया जाता है कि ये मीडिया हाउस लाक्षणिक रूप से सत्तारूढ़ दल की गोद में बैठे हैं, अपनी रिपोर्टिंग में अत्यधिक मित्रतापूर्ण या पक्षपाती हैं. यह शब्द अक्सर इन मीडिया हाउसेस के आलोचकों द्वारा यह बताने के लिए उपयोग किया जाता है कि वे अपनी पत्रकारिता में स्वतंत्र और उद्देश्यपूर्ण नहीं हैं. इसे भी पढ़ें -गिरिडीह">https://lagatar.in/3-powerful-kurmi-leaders-are-in-the-fray-in-giridih-lok-sabha-constituency-who-will-get-the-blessings-of-the-public/">गिरिडीह

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