Ranchi : DSPMU रांची में विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से यूजीसी रेगुलेशन (इक्विटी) एक्ट पर कोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे के विरोध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में छात्र नेताओं ने कहा कि यह स्टे शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त जातीय भेदभाव और उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाला कदम है.
छात्र संगठनों ने चिंता जताई कि खुद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच शिक्षण संस्थानों में जातीय उत्पीड़न के मामलों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है.
अखिल भारतीय समता मंच और ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले आयोजित इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 13 फरवरी को देश के लगभग 100 विश्वविद्यालयों में एक साथ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य रोहित वेमुला एक्ट की तर्ज पर यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लागू करवाना है, ताकि विश्वविद्यालयों में समानता को सुनिश्चित किया जा सके और भेदभाव की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.
ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के झारखंड राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने बताया कि यह आंदोलन केवल राज्यस्तरीय नहीं, बल्कि देशव्यापी होगा, जिसमें झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र भाग लेंगे. वहीं संजना मेहता ने जानकारी दी कि इस मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने के लिए देश के हर राज्य में ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी का गठन किया गया है.
बैठक में आदिवासी छात्र संघ, आइसा (AISA), आइएसएफ (AISF), एमएसएफ (MSF), एमवीएस (MVS), जेसीएम (JCM), सीआरजेडी (CRJD), जेएसयू (JSU) और एसएफआई (SFI) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे.
वक्ताओं ने बताया कि प्रदर्शन से पहले विभिन्न विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों को यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के प्रावधानों के बारे में जागरूक किया जाएगा. छात्र संगठनों के अनुसार, इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में छात्रों के शामिल होने की संभावना है.
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