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ओलचिकी के जन्मदाता पं.रघुनाथ मुर्मू की विरासत से रूबरू हुए छात्र व छात्राएं

नरवा पहाड़ यूसिल कॉलोनी जाहेरगाढ़ ओल ईतुन आसड़ा के विद्यार्थियों ने सोमवार को पं. रघुनाथ मुर्मू हेरिटेज ट्रस्ट, डांडपुस (मयूरभंज, ओडिशा) का शैक्षणिक भ्रमण किया. जहां हेरिटेज ट्रस्ट के सदस्यों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों भव्य स्वागत किया.
 

Jadugora: नरवा पहाड़ यूसिल कॉलोनी जाहेरगाढ़ ओल ईतुन आसड़ा के विद्यार्थियों ने सोमवार को पं. रघुनाथ मुर्मू हेरिटेज ट्रस्ट, डांडपुस (मयूरभंज, ओडिशा) का शैक्षणिक भ्रमण किया. जहां हेरिटेज ट्रस्ट के सदस्यों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों भव्य स्वागत किया. 

 

 

इसका मकसद विद्यार्थियों को ओलचिकी भाषा, लिपि और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना था. इस  शैक्षणिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने पंडित रघुनाथ मुर्मू के जीवन, संघर्ष और संथाल समाज में उनके अद्भुत योगदान के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की. 

 

शैक्षणिक भ्रमण में शामिल नरवा पहाड़ माझी बाबा वीरेन टुडू ने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में ओलचिकी लिपि का आविष्कार किया, जो कि संथाली भाषा के लिए पहला मूल रूप से विकसित लिपि है और इसे संताली भाषा का आधिकारिक वर्णमाला माना जाता है. 

 

इससे पहले संताली भाषा केवल मौखिक रूप से चली आ रही थी और लिखने के लिए अन्य लिपियों (बंगाली, ओड़िया, रोमन आदि) का उपयोग होता था, जो इसकी ध्वनियों को सही रूप से नहीं दर्शा पाती थी.  

 

उन्होंने जानकारी दी कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने न केवल ओलचिकी लिपि विकसित की, बल्कि उसके माध्यम से संथाली साहित्य, गीत, नाटक, पाठ्यपुस्तकें और ज्ञान सामग्री का भी सृजन किया, जिससे संथाली समुदाय की भाषा-साहित्य की पहचान मजबूत हुई. 


उन्होंने कहा कि इस अवसर पर विद्यार्थियों को समझाया गया कि अपनी भाषा और लिपि को सीखना, जानना और सम्मान देना क्यों महत्वपूर्ण है क्योंकि यही हमारी असली पहचान, संस्कृति और विरासत है. 

 

जैसे पंडित रघुनाथ मुर्मू ने अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पण दिखाया और संथाली भाषा को लेखन भाषा का स्वरूप दिया. वैसे ही आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी भाषा व लिपि को संभालने और आगे ले जाने की प्रेरणा प्राप्त हुई.

 

इस शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व नरवापहाड़ के माझी बाबा बिरेन टुडू ने किया. उनके साथ प्रधानाध्यापक दुर्गा प्रसाद मुर्मू, शिक्षिका गुरुवारी सरदार, नायके बाबा सलखु मुर्मू, सेक्रेटरी सोनाराम हांसदा, प्रेसिडेंट दिलीप कुमार मुर्मू सहित फुदन मारडी, बंगाल टुडू, मानसिंह किस्कू, सुरेश मुर्मू, कारु माझी, जगबल सरदार, बिक्रम हांसदा, लक्ष्मी टुडू, बाहा हांसदा, सुनिता मुर्मू, सीता बेसरा, पार्वती टुडु, श्यामली माझी, मायनो मुर्मू, संजु सोरेन, कारमी मुर्मू, माया मुर्मू, सोनीया माझी, अनीता किस्कू, चंपा मुर्मू, लक्ष्मी हांसदा, हिरानी और मायनो सहित अन्य विद्यार्थी व अभिभावक भी उपस्थित रहे.

 

 

 

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