Ranchi News: रांची के ठाकुरगांव स्थित नीलाई एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (NETGi) को लेकर तकनीकी छात्र संघ ने गंभीर आरोप लगाए हैं. संघ ने अपने फेसबुक हैंडल पर साझा जानकारी में दावा किया है कि कॉलेज प्रशासन ने B.Tech के 4th और 6th सेमेस्टर के उन छात्रों के Internal और External Marks रोकने और Bonafide Certificate जारी नहीं करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने छात्रवृत्ति की राशि से संबंधित शुल्क का भुगतान नहीं किया है. इसको लेकर छात्रों में नाराजगी की बात कही गई है.
तकनीकी छात्र संघ के अनुसार, छात्रों का आरोप है कि एडमिशन के समय उन्हें बताया गया था कि छात्रवृत्ति की राशि मिलने के बाद कॉलेज की फीस जमा की जा सकती है. आरोप है कि अब सेमेस्टर के बीच में छात्रों पर शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है.
अटेंडेंस को लेकर भी लगाए आरोप
संघ की ओर से साझा जानकारी में छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि एडमिशन के समय कुछ छात्रों को अटेंडेंस को लेकर आश्वासन दिया गया था. आरोप है कि कई ऐसे छात्र हैं, जो नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते, लेकिन उनकी उपस्थिति दर्ज की जाती है. छात्रों ने सवाल उठाया है कि यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जानकारी संबंधित विश्वविद्यालय अथवा तकनीकी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को है या नहीं.
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फीस के लिए अंक रोकने पर सवाल
तकनीकी छात्र संघ ने कहा है कि छात्रवृत्ति मिलने में देरी कई बार सरकारी प्रक्रिया या तकनीकी कारणों से होती है. इसमें छात्रों की भूमिका नहीं होती. ऐसे में फीस के मुद्दे पर Internal और External Marks रोकने और Bonafide Certificate जारी नहीं करने की बात छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है.

कॉलेज की ओर से जारी नोटिस
संघ ने सवाल उठाया है कि यदि एडमिशन के समय छात्रवृत्ति मिलने के बाद फीस जमा करने की बात कही गई थी, तो बाद में छात्रों पर शुल्क भुगतान का दबाव क्यों बनाया जा रहा है. साथ ही, फीस वसूली के लिए परीक्षा के अंकों को रोकना उचित है या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए गए हैं.
डिप्लोमा छात्रों ने भी लगाए गंभीर आरोप
तकनीकी छात्र संघ की पोस्ट में डिप्लोमा कोर्स के कुछ छात्रों के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है. छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के कुछ शिक्षकों द्वारा उनसे कथित तौर पर नकद राशि ली जाती थी और परीक्षा में सेंटर मैनेज करने तथा कॉपी सेटिंग कराने का आश्वासन दिया जाता था. आरोप है कि परीक्षा में फेल होने के बाद संबंधित शिक्षक कथित तौर पर पैसे लेने से इनकार कर देते थे.
पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस कथित व्यवस्था में कॉलेज के अधिकारी, शिक्षक, क्लर्क और ऑपरेटर तक शामिल हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव का आरोप
तकनीकी छात्र संघ ने कहा है कि कई गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार खेती-बाड़ी और मजदूरी कर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं. संघ का आरोप है कि कॉलेज में एडमिशन के दौरान किए गए कथित आश्वासनों और बाद में फीस को लेकर बनाए जा रहे दबाव से ऐसे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ रहा है.
संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कॉलेज प्रशासन और संबंधित विश्वविद्यालय/तकनीकी शिक्षा अधिकारियों से छात्रों की शिकायतों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है.
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