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आंदोलन के बाद भी जारी है छात्रों की लड़ाई, राहुल क्रांति ने CM को लिखा पत्र

Ranchi News: राहुल क्रांति ने पत्र में कहा है कि JPSC/JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर कथित धांधली के विरोध में छात्रों ने 26 दिनों तक लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन किया था. इस दौरान छात्रों की आवाज को दबाने के लिए राज्य के विभिन्न थानों में FIR दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है.
 
छात्र आंदोलन

Ranchi News: JPSC/JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, OMR लीक और सेटिंग के आरोपों को लेकर अगस्त में 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद भी छात्रों की मांगों को लेकर लड़ाई जारी है. आंदोलनकारी राहुल क्रांति ने 5 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने समेत तीन प्रमुख मांगें रखी हैं.

 

राहुल क्रांति ने पत्र में कहा है कि JPSC/JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर कथित धांधली के विरोध में छात्रों ने 26 दिनों तक लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन किया था. इस दौरान छात्रों की आवाज को दबाने के लिए राज्य के विभिन्न थानों में FIR दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है.

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आंदोलन के दौरान राहुल क्रांति भी लगातार छात्रों के साथ मौजूद रहे और करीब 12 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे. अगस्त में आंदोलन समाप्त होने के बाद अब उन्होंने छात्रों पर दर्ज मामलों और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया है.

 

पत्र में राहुल क्रांति ने कहा है कि छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से झारखंड में छात्रों पर दर्ज FIR को तत्काल रद्द करने की मांग की है.

 

मुख्यमंत्री से तीन मांगें

पहली मांग है कि झारखंड के विभिन्न थानों में छात्रों पर दर्ज FIR तत्काल रद्द की जाए.

 

दूसरी मांग के तहत उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने वाले पुलिसकर्मियों और JMM कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.

 

तीसरी और अहम मांग में उन्होंने वर्ष 2014 से अब तक JPSC/JSSC परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच CBI से कराने की अनुशंसा करने की मांग की है.

 

राहुल क्रांति ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद छात्रों की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं. ऐसे में सरकार को छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए.

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