Ranchi: धनबाद के बहुचर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में करीब 15 वर्षों बाद कोर्ट का फैसला आया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक समेत 30 आरोपियों को दंगा, सरकारी कार्य में बाधा और आगजनी से संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए अधिकतम तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई. हालांकि 30 आरोपियों में से 3 की मौत पहले ही हो चुकी है.
इस बहुचर्चित गोलीकांड में शुक्रवार को दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से मामले में प्रभावी कानूनी पहल करने की मांग की है. सुबोध कांत सहाय ने कहा कि सजा पाने वालों में पूर्व मंत्री मन्नान मलिक भी शामिल हैं, जो फिलहाल अस्पताल में पुलिस हिरासत में हैं. उन्होंने कहा कि तत्कालीन डीजीपी ने भी माना था कि पुलिस की ओर से गोली चलाई गई थी, जिसके बाद लोगों में आक्रोश फैला और हालात बिगड़े.
उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन अधिकारी मदन मोहन कुलकर्णी की समिति ने पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन न तो अदालत ने उस रिपोर्ट को मंगाया और न ही सरकारी पक्ष ने उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया. उनके अनुसार, उस रिपोर्ट में घटनाक्रम की पूरी तथ्यात्मक जानकारी मौजूद थी.
सुबोधकांत सहाय ने कहा कि उस समय रांची के कर्बला चौक समेत कई स्थानों पर भी बेदखली के खिलाफ आंदोलन हुए थे और वे स्वयं पूरे कोलफील्ड क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि उस समय केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने विस्थापन रोकने का आग्रह भी किया था.
पूर्व मंत्री ने झारखंड सरकार से मांग की कि मामले से जुड़े सभी तथ्यात्मक दस्तावेज, तत्कालीन डीजीपी के बयान और मदन मोहन कुलकर्णी समिति की रिपोर्ट को हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाए, ताकि दोषियों को न्याय मिल सके. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले की मजबूती से पैरवी करनी चाहिए और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दोषसिद्ध लोगों को राहत दिलाने का प्रयास करना चाहिए.
ये है मामला
यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है जब मटकुरिया में बीसीसीएल के क्वार्टरों को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम का आंदोलनकारियों से हिंसक टकराव हो गया था. हालात बेकाबू होने पर हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे.घटना के बाद तत्कालीन एसडीओ के लिखित आवेदन पर बैंक मोड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
करीब डेढ़ दशक तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने इस चर्चित मामले में अपना फैसला सुनाया. सुनवाई के दौरान मामले के कुछ प्रमुख आरोपितों का निधन भी हो चुका है जिनमें पूर्व मंत्री बच्चा सिंह, पूर्व मंत्री ओ.पी. लाल और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह शामिल हैं.
फैसले के बाद दोषियों को सजा सुनाई गई लेकिन उन्हें जमानत भी प्रदान कर दी गई. इस निर्णय के साथ धनबाद के सबसे चर्चित और लंबे समय तक न्यायालय में लंबित रहे मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया.
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