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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया, कहा, सभी धर्मांतरण अवैध नहीं, सात फरवरी को सुनवाई

NewDelhi : सभी धर्मांतरण को गैर कानूनी नहीं कहा जा सकता. यह कहते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया. उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को सूचित किये बिना शादी करने वाले अंतरधार्मिक जोड़ों पर मुकदमा चलाने से रोक लगाने का विरोध किया गया था. इसे भी पढ़ें : बागपत">https://lagatar.in/baghpat-bharat-jodo-yatra-proceeded-at-6-am-rahul-gandhi-was-seen-wearing-the-familiar-white-t-shirt/">बागपत

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अवैध धर्मांतरण के लिए विवाह का इस्तेमाल किया जाता है

जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार ने सुनवाई के क्रम में कहा कि सभी धर्मांतरण को अवैध नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 7 फरवरी को निर्धारित की गयी है. राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर अवैध धर्मांतरण के लिए विवाह का इस्तेमाल किया जाता है, तो वह आंख बंद नहीं सकती. हालांकि उन्होंने कहा कि शादी या धर्मांतरण पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसके लिए केवल जिलाधिकारी को सूचित करना आवश्यक है. इसे भी पढ़ें : रीजीजू">https://lagatar.in/rijiju-lays-foundation-stone-of-dalai-lama-center-for-tibetan-and-indian-ancient-wisdom-at-bodh-gaya/">रीजीजू

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तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगायी जाये. लेकिन SC ने कोई निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया. राज्य सरकार ने दलील दी थी कि उच्च न्यायालय के आदेश ने धारा 10 (1) को मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 10 (2) के साथ मिला दिया है. इसमें कहा गया है कि जो प्रावधान धर्मांतरण के इच्छुक नागरिको पर लागू होता है, वह धारा 10(1) है और इस प्रावधान के उल्लंघन का कोई दंडात्मक परिणाम नहीं है और कोई मुकदमा नहीं चलाया जाता है. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/in-jharkhand-try-hard-coal-workers-bat-bat-all-primary-schools-closed-till-8/">झारखंड

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धारा 10 (2) के दंडात्मक परिणाम हैं

राज्य सरकार का कहना था कि यह धारा 10 (2) है, जिसके दंडात्मक परिणाम हैं. यह एक पुजारी या उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो सामूहिक धर्मांतरण से दूसरों को धर्मांतरित करना चाहता है. इसमें कहा गया है कि धारा 10 (2) की वैधता को किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन के रूप में नहीं परखा जा सकता, क्योंकि दूसरों को परिवर्तित करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है.

   धर्मांतरण करने वालों 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा

जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने नवंबर 2022 में अपने फैसले में, राज्य सरकार को वयस्क नागरिकों पर मुकदमा चलाने से रोक दिया था, अगर वे अपनी इच्छा से विवाह करते हैं और मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (एमपीएफआरए), 2021 की धारा 10 का उल्लंघन करते हैं. प्रावधान के अनुसार धर्मांतरण करने का इरादा रखने वाले व्यक्तियों और धर्मांतरण करने वाले पुजारी को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा. बताया जाता है कि उच्च न्यायालय ने अधिनियम की धारा 10 को प्रथम द्रष्टया असंवैधानिक माना था. उच्च न्यायालय ने कहा था, अगले आदेश तक प्रतिवादी वयस्क नागरिकों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा, यदि वे अपनी इच्छा से विवाह करते हैं. अधिनियम 21 की धारा 10 के उल्लंघन के लिए कठोर कार्रवाई नहीं की जायेगी. [wpse_comments_template]  

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