Search

सुप्रीम कोर्ट से 51 रुपये की मजदूरी पर नियुक्त मोती राम की सेवा नियमित करने का आदेश

 New delhi /Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने 51 रूपये प्रति दिन की मजदूरी पर माली के रुप में काम करने वाले मोती राम की सेवा नियमित करने का आदेश दिया है. मोती राम जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में माली के पद पर नियुक्त हुए थे. 2022 से शुरू हुई कानूनी जंग के बाद सुप्रीम कोर्ट से 2026 में सेवा नियमित करने का आदेश मिला. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग किया.

 

देवघर के बमपास टाउन निवासी मोती राम को देवघर मार्केटिंग बोर्ड में जून 2001 में माली के पद पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में की गयी थी. मार्केटिंग बोर्ड के प्रशासनिक भवन के पास आम के 10 पौधे लगाये गये थे. इन पौधों की देखभाल को लिए मोती राम की नियुक्ति की गयी थी. उनकी मजदूरी 51 रुपये प्रति दिन निर्धारित की गयी थी.


2015 में मोती राम ने देवघर एग्रिकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सह चैयरमैन को एक आवेदन दिया. इसमें प्रति माह सिर्फ 4346 रुपये मासिक मजदूरी मिलने का उल्लेख करते हुए मजदूरी बढ़ाने का अनुरोध किया. इस आवेदन पर विचार करने के बाद देवघर के तत्कालीन उपायुक्त मार्च 2015 में मोती राम को मासिक 7593 रुपये मजदूरी देने का आदेश जारी किया.

 

वर्ष 2020 में उपायुक्त की ओर से 10 साल या उससे अधिक समय से नियमित रूप से काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने से संबंधित एक सूचना प्रकाशित किया. साथ ही इसके लिए आवेदन की मांग की. इसके आलोक में मोती राम ने भी अपनी सेवा नियमित करने का आवेदन दिया. लेकिन आवेदन पर विचार कर कोई फैसला नहीं होने की वजह से मोती राम ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की.

 

याचिका में उन्होंने अपनी सेवा नियमित करने की मांग की. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मार्केटिंग बोर्ड और जिला प्रशासन की ओर से यह तर्क पेश किया गया कि मोती राम को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था. इसमें सेवा नियमित करने की कोई शर्त नहीं थी. हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फरवरी 2023 में फैसला सुनाते हुए मोती राम की याचिका खारिज कर दी.

 

इसके बाद मोती राम ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद न्यायाधीश राजेश कुमार की पीठ में मोती राम की याचिका की सुनवाई हुई. इसमें मार्केटिंग बोर्ड की ओर से यह दलील दी गयी कि माली का कोई स्वीकृत पद नहीं है. इसलिए सेवा नियमित नहीं की जी सकती है. लेकिन हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाया कि 24 साल तक दैनिक वेतन भोगी के मजदूर के रूप में काम करने और सेवा नियमित करने के लिए आवेदन मांगे कि घटना के मद्देजर मोती राम की सेवा नियमित करने का आदेश दिया. 

 

लेकिन हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सेवा नियमित करने के बदले मार्केटिंग बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी. मार्केटिंग बोर्ड की याचिका पर न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश एसवीएन भट्टी की अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने संविधान की धारा 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए बोर्ड की याचिका खारिज कर दी.

 

 


Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp