NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) कानून के तहत प्रतिबंधित संगठनों की सदस्यता पर अपने ही 12 साल पुराने फैसले को गलत करार दिया. जान लें कि जस्टिस एमआर शाह, सीटी रविकुमार और संजय करोल की बेंच ने केंद्र और असम सरकार की रिव्यू पिटीशन पर फैसला सुनाते समय 2011 में दिये गये फैसले को खारिज कर दिया. इसे भी पढ़ें : राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhis-parliament-membership-cancelled-congress-said-will-not-bow-down-to-threats-will-not-remain-silent-fight-will-continue/">राहुल
गांधी की संसद सदस्यता रद्द : बोली कांग्रेस, धमकी के आगे नहीं झुकेंगे, खामोश नहीं होंगे, लड़ाई जारी रहेगी
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प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होना भी अपराध
बेंच ने माना कि यदि कोई प्रतिबंधित संगठन का सदस्य है तो उसे अपराधी मानते हुए UAPA (अनलॉफुल एट्रॉसिटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. यानी उसके खिलाफ भी मुकदमा चलेगा. कोर्ट ने 8 फरवरी को रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई शुरू की थी. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सीनियर एडवोकेट संजय पारिख की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसे भी पढ़ें : Big">https://lagatar.in/big-breaking-rahul-gandhis-parliament-membership-cancelled-lok-sabha-secretariat-issues-notification/">BigBreaking : राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द , लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी किया
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