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तालिबान का दावा, एफ-16 मार गिराया, पाकिस्तान का ऑपरेशन गजब लिल-हक शुरू, काबुल, कंधार पर बम बरसाये

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक जलते हुए विमान के मलबे की तस्वीर और वीडियो वायरल है. दावा किया जा रहा है कि यह अफगान सेना ने द्वारा मार गिराया गया पाकिस्तानी एफ-16 जेट है.
 
  • 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों के मारे गिराये जाने का दावा
  • पाकिस्तान अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा
  • अफगानिस्तानी रक्षा मंत्रालय का 55 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा

 Islamabad :  अफगान सेना द्वारा हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने पर पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान मार गिराये जाने की खबर है. अफगानिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थान टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार विमान अफगान एयरस्पेस में दाखिल हुआ और उसे मार गिराया गया.

 

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक जलते हुए विमान के मलबे की तस्वीर और वीडियो वायरल है. दावा किया जा रहा है कि यह अफगान सेना ने द्वारा मार गिराया गया पाकिस्तानी एफ-16 जेट है.


हालांकि पाकिस्तान ने इस मामले में  कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.अहम बात यह है कि वायरल वीडियो और तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. 


उधर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध घोषित करते हुए ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक़ शुरू  करने की बात कही है.  पीटीवी न्यूज़ के अनुसार आज शुक्रवार तड़के पाकिस्तानी सेनाओं ने काबुल, कंधार सहित अन्य जगहों पर मौजूद सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किये हैं. 


पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया, हमारा सब्र खत्म हो चुका है. उन्होने चेतावनी देते हुए कहा, यह खुला युद्ध है


प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बयान जारी कर कहा है कि  पाकिस्तान शांति और अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा,


दावा किया कि 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों के मारे गिराये गये. हमारी सेन  अफगानिस्तान के मंसूबे को कुचलने की पूरी क्षमता रखते हैं.   

खबरों के अनुसार पाकिस्तान के प्रवक्ता ने कहा है कि ऑपरेशन गज़ब लिल-हक़ के तहत आज आज तड़के खैबर पख्तूनख्वा के चितराल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में हमले किये गये. 
 

इससे पहले अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि डूरंड रेखा के साथ कल गुरुवार को की गई जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गये. जान लें कि 2,500 किलोमीटर लंबी सीमा  (डूरंड रेखा) को अफगानिस्तान ने कभी भी मान्यता नहीं दी है.  

 

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