Saraikela News: आदिवासी भूमिज मुंडा समिति, सिनी सरायकेला के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी समेत प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में जिला मुख्यालय स्थित भगवान बिरसा मुंडा उद्यान और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम का नाम यथावत रखने की मांग की गई है.
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संगठन के सदस्यों ने कहा कि वे किसी भी महापुरुष या शहीद के सम्मान के विरोध में नहीं हैं. वीर सिदो-कान्हू और दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित सभी आदिवासी महापुरुषों के सम्मान में अलग-अलग स्मारक, पार्क और संस्थान बनाए जाने चाहिए. लेकिन पहले से बने और अभिलेखों में दर्ज किसी स्थल का नाम बदलकर दूसरे महापुरुष के नाम पर करना उचित नहीं है.
ज्ञापन में दावा किया गया है कि सरायकेला उपायुक्त आवास के सामने स्थित पार्क सरकारी अभिलेखों और नगर पंचायत के प्रस्ताव रजिस्टर में भगवान बिरसा मुंडा उद्यान के नाम से दर्ज है. संगठन के अनुसार, इस उद्यान का शिलान्यास 11 अप्रैल 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने तत्कालीन उपायुक्त नागेंद्र प्रसाद सिंह और तत्कालीन आरक्षी अधीक्षक लक्ष्मण प्रसाद सिंह की मौजूदगी में किया था. संगठन ने कहा कि शिलान्यास का पत्थर आज भी स्थल पर मौजूद है.
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट सरकारी आदेश के पार्क में वीर सिदो-कान्हू की प्रतिमा स्थापित की गई है. इससे सरकारी रिकॉर्ड और स्थल पर प्रचलित नाम को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है.
संगठन ने जिला मुख्यालय स्थित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम को लेकर भी आपत्ति जताई. ज्ञापन में कहा गया कि वर्षों से निर्मित इस स्टेडियम का नाम भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर है और स्थानीय युवा इसे इसी नाम से जानते हैं.
संगठन का आरोप है कि स्टेडियम परिसर में स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए भूमिपूजन की प्रक्रिया की जा रही है. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शिबू सोरेन का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए बिरसा मुंडा स्टेडियम का नाम बदलना उचित नहीं होगा. संगठन ने शिबू सोरेन के नाम पर अलग से नया स्टेडियम, टाउन हॉल या प्रवेश द्वार बनाने की मांग की.
ज्ञापन में कहा गया कि ऐसे मामलों से आदिवासी समाज के बीच आपसी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. संगठन ने प्रशासन से सभी आदिवासी महापुरुषों और शहीदों को समान सम्मान देने तथा उनके नाम पर अलग-अलग स्मारक एवं संस्थान विकसित करने की मांग की.
प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की.
संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर बिरसा मुंडा उद्यान और स्टेडियम के नाम में बदलाव की प्रक्रिया पर लिखित रोक नहीं लगाई गई और मामले की जांच नहीं हुई, तो व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा. इसमें धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और जिला मुख्यालय घेराव जैसे कार्यक्रम शामिल होने की बात कही गई है.
प्रतिनिधिमंडल में हरा सरदार, एमपी सरदार, विश्वजीत सरदार, दिवाकर सरदार, कार्तिक सरदार, रामू सरदार और रंजीत सरदार सहित संगठन के अन्य सदस्य मौजूद थे.
ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कल्याण विभाग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है.
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