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शिक्षक असमंजस की स्थिति में
ऐसे में अगर बच्चे मध्याह्न भोजन नहीं कर रहे, तो उसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा. इस भय से शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं और गांव-देहात जाकर बच्चों को अपने पोषक क्षेत्र में तलाश रहे हैं. बच्चों को मध्याह्न भोजन की खातिर स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से मिन्नत भी कर रहे हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि अगर स्कूल छोड़कर बच्चों को बुलाने जाते हैं और किसी पदाधिकारी का निरीक्षण हो गया, तो उसमें भी वह फंसेंगे. अगर बच्चे मध्याह्न भोजन करने नहीं आते हैं, तो भी उन पर कार्रवाई होगी. अगर बच्चे स्कूल नहीं आए, तो मध्याह्न भोजन की बर्बादी भी होगी. दिन के एक बजे बच्चों को मध्याह्न भोजन के लिए बुलाया गया है. किसी वैवाहिक कार्यक्रम की तर्ज पर बच्चों को आमंत्रण और विजय कराना पड़ रहा है. लेकिन वरीय पदाधिकारियों का आदेश है, तो कोई न कोई उपाय तो भिड़ानी ही होगी. इसे भी पढ़ें - अब">https://lagatar.in/now-on-march-5-adivasi-bachao-maharally-will-protest-against-making-planning-policy-and-including-kurmi-in-st-list/">अब5 मार्च को होगी आदिवासी बचाओ महारैली, नियोजन नीति बनाने और कुर्मी को एसटी सूची में शामिल करने का करेंगे विरोध
छुट्टी में भी मिड डे मील का आदेश हतप्रभ
इस संबंध में झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. अतिकुज्जमा ने बताया कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को छुट्टी दे दी गई है, परंतु मध्याह्न भोजन खिलाना है, तो खाना बने कैसे. शिक्षक 9:00 बजे सभी बच्चों के घर घूम-घूमकर खाना के लिए आज्ञा मांगे और 1:00 बजे पुन: घूमकर विजय कराए. खाना न घटे और न बर्बाद हो. यह आदेश हतप्रभ करने जैसा और शिक्षकों को सिर्फ परेशान करने के लिए है. इसे भी पढ़ें - 2128">https://lagatar.in/contractors-are-not-available-to-deliver-mid-day-meal-grains-to-2128-government-schools-tender-time-extended/">2128सरकारी स्कूलों में मिड डे मील का अनाज पहुंचाने के लिए नहीं मिल रहे ठेकेदार, टेंडर का बढ़ाया समय [wpse_comments_template]

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