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दिवाली को लेकर मोरहाबादी में सजा टेराकोटा घरौंदों का बाजार

Ranchi : बंगाल और झारखंड बोर्डर पर चंदन क्यारी मंडरा गांव स्थित है. रांची से 200 किमी दूर इस गांव के अधिकांश लोग मिट्टी से संबंधित वस्तुएं बनाते है. दिवाली के लिए छह महीने से तैयार की जाती है. जिसमें घरौंदों, दीपक, गुलक, गणेश और बौद्ध प्रतिमाओं समेत अन्य वस्तुएं शामिल है. मोरहाबादी में दुकानें सज चुकी हैं और खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है.

 

हर दो साल बाद मांग और कीमत पर बदलते है बिक्री स्थान

पिछले दो सालों से बोकारो जिले के मांडरा गांव के 11 कुम्हार परिवार मोरहाबादी पर टेराकोटा मिट्टी से तैयार घरौदा बेचने पहुंचे है. चंदन क्यारी बोकारो से आए नकुल कुंभकार, कमल कुंभकार और भागीरथ कुंभकार के परिवार छह महीने की मेहनत के बाद तैयार की है.

 

इस बार बाजार में 2 से 3 हजार घरौंदे बिक्री के लिए लाए गए हैं. भागीरथ कुंभकार ने बताया कि बाजार में प्रतिस्पर्धा होने के कारण बिक्री और दाम में गिरावट आई है. पिछले साल एक घरौदा 500-600 रूपये प्रति घरौदा बेचे थे, लेकिन इस बार दुकान की संख्या बढ़ जाने के कारण करीब दो सौ रूपये गिरावट आई है.

 

इस बार की किमत, छोटा घरौंदा 250, मीडियम 350 और बड़ा 500 रुपये में मिल रहा है. इससे पहले धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर में भी दुकान लगा चुके है. मांग और कीमत पर दो साल में दुकान स्थान बदलते है.

 

नकुल कुंभकार बताते हैं कि, हम लोग हर साल दीपावली से दस दिन पहले दुकान सजाते हैं. पिछले साल अच्छी बिक्री हुई थी, लेकिन इस बार दुकानों की संख्या बढ़ने से दामों में गिरावट आई है. कुम्हार परिवारों ने बताया कि वे 200 किलोमीटर दूर बोकारो से करीब 5 घंटे की यात्रा कर 8 हजार रुपये किराया देकर रांची पहुंचे हैं.

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