Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) की डिग्री विज्ञान (Science) स्ट्रीम के अंतर्गत आती है.कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की वर्ष 2014 की अधिसूचना में BCA को विज्ञान स्ट्रीम में रखा गया है और यह प्रावधान केवल नई व्यवस्था लागू करने वाला नहीं, बल्कि डिग्री की स्ट्रीम को स्पष्ट करने वाला है. इसलिए इसे पूर्व की डिग्रियों पर भी लागू माना जा सकता है.
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की दो अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. दोनों अपीलें BCA डिग्रीधारियों की नियुक्ति से संबंधित थीं. मामले में प्रतिवादी मुकेश रंजन की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा.
हाईकोर्ट ने कहा कि जब अभ्यर्थी विज्ञापन में निर्धारित अन्य सभी योग्यताएं पूरी करता है और उसके अंक अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक हैं, तो केवल BCA डिग्री होने के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती.
हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उन आदेशों को सही ठहराया, जिनमें दोनों अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था. दोनों अभ्यर्थियों ने बाद में सेवा भी ज्वाइन कर ली थी. मुकेश रंजन ने 1 अक्टूबर 2024 को और अभिजीत कुमार सिन्हा ने 4 अप्रैल 2025 को सेवा ज्वाइन की थी.
BCA डिग्री के आधार पर TGT नियुक्ति से किया गया था वंचित
दरअसल, यह मामला शारीरिक शिक्षा विषय में ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) के पद पर नियुक्ति से जुड़ा था. भर्ती विज्ञापन में अभ्यर्थी के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों के साथ Arts, Science अथवा Commerce में स्नातक तथा शारीरिक शिक्षा की डिग्री अनिवार्य की गई थी.
अभिजीत कुमार सिन्हा ने वर्ष 2005 में IGNOU से BCA की डिग्री हासिल की थी और उनके पास शारीरिक शिक्षा की डिग्री भी थी. इसी तरह मुकेश रंजन ने सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय से BCA की डिग्री प्राप्त की थी और उनके पास भी Physical Education की डिग्री थी. JSSC ने दोनों की उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि BCA डिग्री Arts, Science या Commerce में स्नातक डिग्री नहीं है. इसके बाद दोनों अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
UGC की 2014 की अधिसूचना को कोर्ट ने माना स्पष्टकारी
राज्य सरकार और JSSC की ओर से तर्क दिया गया था कि दोनों अभ्यर्थियों ने 2014 से पहले BCA की डिग्री हासिल की थी. वर्ष 2009 की UGC अधिसूचना में BCA को केवल “Bachelor of Computer Applications” के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, उसमें इसे किसी विशेष स्ट्रीम में नहीं रखा गया था.
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि वर्ष 2014 में UGC ने BCA को Science Stream में रखा, लेकिन यह अधिसूचना भविष्य के लिए लागू थी. इसलिए इससे पहले प्राप्त BCA डिग्री को विज्ञान स्नातक नहीं माना जा सकता.
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. खंडपीठ ने कहा कि 2014 की अधिसूचना में डिग्रियों की जानकारी clarity यानी स्पष्टता के लिए तालिका के रूप में दी गई थी. BCA की नई डिग्री या नया नामकरण नहीं किया गया, बल्कि उसकी स्ट्रीम स्पष्ट की गई.कोर्ट ने कहा कि BCA को किसी दूसरी स्ट्रीम में पुनर्गठित या डी-स्पेसिफाई नहीं किया गया था. केवल यह स्पष्ट किया गया कि BCA Science Stream से संबंधित है.
पहले की BCA डिग्री पर भी लागू होगा स्पष्टीकरण
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई प्रावधान यदि केवल स्पष्टीकरणात्मक (clarificatory) या सुधारात्मक प्रकृति का है, तो सामान्यतः उसका प्रभाव पूर्व की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए भी हो सकता है.
कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2009 की अधिसूचना में BCA को UGC Act की धारा 22 के तहत मान्यता प्राप्त डिग्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया था. वर्ष 2014 की अधिसूचना में इसी डिग्री की स्ट्रीम स्पष्ट करते हुए इसे Science में रखा गया. खंडपीठ ने यह भी माना कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने 10+2 की पढ़ाई भी विज्ञान स्ट्रीम से की थी.
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