- 421 पदों पर महिला सुपरवाइजरों की नियुक्ति का मामला
- मामले में नियुक्ति पर लगी रोक हटाई
- रिट पिटीशन के अंतिम निर्णय से महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति होगी प्रभावित
- कोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेने का मामला नहीं माना
- कोर्ट ने मामले को वापस सुनवाई के लिए एकल पीठ को भेजा
Ranchi: हाईकोर्ट ने कहा, महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति का मामला 100 प्रतिशत सीट आरक्षित होने का मामला नहीं है. कोर्ट ने मामले को वापस सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की एकल पीठ में भेज दिया है. खंडपीठ ने मामले में नियुक्ति पर लगी रोक हटा ली. कहा कि इस रिट पिटीशन के अंतिम निर्णय से महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति प्रभावित होगी.
कोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेने का मामला नहीं माना है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 100 प्रतिशत महिलाओं के लिए सीट आरक्षित होने या ना होने के बिंदु पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा था. खंडपीठ ने महिला सुपरवाइजरों की नियुक्ति मामले में आकांक्षा कुमारी सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की थी.
मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा था. वही जेएसएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा था. वही प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता चंचल जैन एवं अन्य ने पक्ष रखा था. हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अर्पण मिश्रा एवं अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने पक्ष रखा.
दरअसल, मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने इस मामले को सक्षम हाईकोर्ट की खंडपीठ में भेजने का निर्देश दिया था. जिसके बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही थी. एकल पीठ ने इस बिंदु पर निर्णय के लिए खंडपीठ को भेजा है कि क्या कोई पद शत- प्रतिशत प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकता है या नहीं.
क्या है प्रार्थी का पक्ष
मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई में प्रार्थी की ओर से कहा गया था कि नियुक्ति में किसी वर्ग को शत- प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. इसमें सिर्फ महिलाओं से आवेदन मांगा गया ह.
क्या है मामला
जेएसएससी ने बाल कल्याण विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. प्रार्थी भी इस परीक्षा शामिल हुए लेकिन आयोग की ओर से प्रार्थियों का चयन यह कहते हुए नहीं किया कि इनकी शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं है.
प्रार्थियों के पास विज्ञापन में निर्धारित मुख्य विषय की बजाय सहायक विषयों की डिग्री है. जबकि नियुक्ति नियमावली में ऐसा नहीं है. सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि नियुक्ति में किसी वर्ग को शत- प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. इसमें सिर्फ महिलाओं से आवेदन मांगा गया है.
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