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बाइबल केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि पवित्र जीवन, न्याय व प्रेम का जीवंत संदेश-अनिल डहंगा

Ranchi : उतर भारत की कलीसिया छोटानागपुर डायसिस मसीही सेवा महिला संगति के तत्वावधान में बहुबाजार स्थित संत पॉल्स कथिड्रल चर्च में एक दिवसीय वार्षिक शिविर का आयोजन हुआ.शिविर आदर्श थीम पर था,जिसमें पर मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा औऱ यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा पर कार्यक्रम की गई.

 

इससे पहले पवित्र प्रभु भोज की आराधना की गई.इसके साथ ही परियय,उपस्थिति लेखा सचिव का चुनाव कराए गए.दोपहर करीब 12 बजे बाईबल अध्ययन हुआ.कडरू पेरिश द्वारा गीत और दान दर्पण की किया गया.शिविर में बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधी उपस्थित रहीं और प्रभु के वचन के माध्यम से आत्मिक बल एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया.

 

इस दौरान मुख्य वक्ता रेव्ह.अनिल डहंगा,मगदली बोदरा,लूसी तेरोम,सहायक पुरोहित जस्टिन भुईया,ग्लोरिया डहंगा,युजे सांगा,निरमा कुजुर समेत सैकडों प्रतिनिधी शामिल हुए.इस दौरान रेव्ह अनिल डहंगा ने अपने संदेश में कहा,बाइबल केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि पवित्र जीवन, न्याय और प्रेम का जीवंत संदेश है.परमेश्वर प्रेममय हैं और वे चाहते हैं कि मनुष्य निरंतर उनसे जुड़े रहें.यह संबंध पवित्र आत्मा के द्वारा स्थापित होता है.उन्होंने कहा कि प्रभु के वचनों को सीखना,समझना और जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है,ताकि युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन दिया जा सके.

 


जब मनुष्य का विश्वास परमेश्वर से डगमगाता है, तब मन भी विचलित हो जाता है .रेव्ह डहंगा ने कहा कि जब मनुष्य का विश्वास परमेश्वर से डगमगाता है, तब मन भी विचलित हो जाता है.परमेश्वर की अनुग्रह में यीशु मसीह ही सच्ची धार्मिकता हैं.विश्वास के बिना अनुग्रह की अनुभूति संभव नहीं है,जबकि यीशु मसीह के द्वारा अनंत जीवन की प्राप्ति होती है.उन्होंने आगे कहा,परमेश्वर केवल प्रेम और दया ही नहीं, ल्कि न्याय भी प्रदान करते हैं.परमेश्वर ने व्यवस्था इसलिए दी है ताकि मनुष्य धार्मिकता और सत्य के मार्ग पर चले.

 

 

 

 

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