Search

मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान को भाकपा माले ने बताया संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन

Ranchi : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की राज्य कमिटी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के उस वक्तव्य की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची (2003) को नागरिकता का आधार बताया है. भाकपा माले ने इस बयान को न केवल गैर-जिम्मेदाराना बताया है, बल्कि इसे चुनाव आयोग की संवैधानिक सीमाओं का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है.

 

पार्टी ने कहा कि संविधान के भाग दो में नागरिकता से जुड़े अनुच्छेदों में चुनाव आयोग की कोई भूमिका निर्धारित नहीं की गई है. नागरिकता को परिभाषित करने, उसकी जांच करने या किसी व्यक्ति को नागरिक घोषित करने या नागरिकता से वंचित करने का अधिकार न तो चुनाव आयोग को है और न ही उसके मुख्य आयुक्त को. चुनाव आयोग मतदाताओं से आवश्यक दस्तावेज मांग सकता है, लेकिन किसी भी मतदाता की नागरिकता तय करना या उसे खारिज करना उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता.

 

भाकपा माले का आरोप है कि इस तरह के बयान से चुनाव आयोग की तटस्थता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. पार्टी ने यह भी कहा कि बिहार में चल रहे विशिष्ट गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग अब तक यह साबित नहीं कर पाया है कि मतदाता सूची में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम शामिल था. इसके उलट, एसआईआर की पूरी प्रक्रिया और तय की गई समय-सीमा ने गरीबों, कमजोर तबकों और प्रवासी मजदूरों को अत्यधिक असुरक्षित बना दिया है.

 

पार्टी के अनुसार, बिहार के हालिया चुनावों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए, जबकि इनमें से कई लोगों ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन भी दिया था. वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, भूमिहीन गरीबों, विस्थापितों और हाशिये के समुदायों के पास अक्सर भूमि या निवास से जुड़े दस्तावेज नहीं होते. ऐसे में झारखंड सहित अन्य राज्यों के इन निवासियों के नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल होंगे, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए.

 

भाकपा माले ने कहा कि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के गरीब तबके जिनमें - अधिकांश दलित और आदिवासी समुदायों से हैं—विकास परियोजनाओं, खनन और अन्य कारणों से विस्थापन का शिकार हुए हैं और अंतर्राज्यीय व अंतर्देशीय पलायन के लिए मजबूर हैं. पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल किया कि इन लोगों के मताधिकार की रक्षा और मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने कौन-सी ठोस व्यवस्था की है.

 

अंत में भाकपा माले ने मांग की कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका की सीमाओं में रहकर कार्य करे और लोकतंत्र के बुनियादी अधिकार—मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित करे.

 

 

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//