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मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री के बेटी-दामाद का बड़कागांव पहुंचने पर भव्य स्वागत

  • रांची एयरपोर्ट पर सगे संबंधी व ग्रामीणों ने फूल माला व पुष्प गुच्छ देकर किया सम्मानित.
  • पैतृक गांव सिमरातरी को दुल्हन की तरह सजाया गया था.

Barkagaon (Hazaribagh) : मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री हरीश बुद्धू की बेटी सचिता बुद्धू (50 वर्ष) और दामाद अजय बुद्धू (55 वर्ष) का पैतृक गांव सिमरातरी (बड़कागांव प्रखंड) पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया.

 

इससे पहले गुरुवार को रांची एयरपोर्ट पहुंचने पर उनके सगे संबंधियों व ग्रामीणों ने फूलमाला पहनाकर व बुके देकर स्वागत किया था. इसके बाद  विश्रामपुर से गाजे-बाजे के साथ सचिता और अजय बुद्धू को गांव तक लाया गया.

 

सिमरातरी गांव को दुल्हन की तरह सजाया गया

बड़कागांव प्रखंड के सिमरातरी गांव, जो डॉ हरीश बुद्धू के पूर्वजों की जन्मभूमि है, को पूर्व उप पीएम के बेटी-दामाद की आने की खुशी में दुल्हन की तरह सजाया गया था. गांव में होली दिवाली मनाई गई.

 

डॉ हरीश बुद्धू और मॉरीशस के भोजपुरी भाषा संघ अध्यक्ष डॉ सरिता बुद्धू की बेटी सचिता बुद्धू और दामाद अजय बुद्धू का स्वागत कुशवाहा समाज के प्रखंड अध्यक्ष सोहनलाल मेहता और सिमरातरी गांव के ग्राम अध्यक्ष केदार महतो ने संयुक्त रूप से किया गया.

 

बता दें कि पूर्व उपप्रधानमंत्री हरीश बुद्धु 1986 और 1991 में गांव आए थे. हरीश बुद्धु ने भारत के तत्कालीन प्रधान राजीव गांधी और बिहार के तत्कालीन मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव की मदद से अपना गांव खोज निकाला था.

 

अपनी जड़ों से जुड़ा हूं : अजय बुद्धू

अजय बुद्धू ने गांव पहुंचने पर कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ा हूं. सच्ची पहचान और विकास की प्रेरणा है. उन्होंने आगे कहा कि पूर्वज लगभग 110 वर्ष पूर्व गन्ने की खेतों में मजदूरी करने मॉरीशस गए थे. बिहार और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग वहां गए थे. 

 

हरीश बुद्धु के दामाद ने कहा कि मॉरीशस की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की मजबूत भागीदारी तब हुई, जब डॉ हरीश बुद्धू उप प्रधानमंत्री बने. समाज सुधार और प्रशासनिक सुधारों के समर्थक भारतीय मूल के नेताओं में उनका प्रमुख स्थान रहा,

 

डॉ हरीश बुद्धू के आने से भारत-मॉरीशस के संबंध मजबूत हुए

डॉ हरीश बुद्धू के आने से भारत और मॉरीशस के संबंध मजबूत हुए. भारत सरकार से संपर्क कर सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया गया. प्रवासी भारतीय विरासत को सम्मान दिलाने में उनका अहम योगदान रहा.

 

दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रिश्तों को नई दिशा मिली. मॉरीशस को छोटा भारत भी कहा जाता है. क्योंकि वहां भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव है. मॉरीशस की लगभग 65 से 70 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है. मॉरीशस में हिंदी और भोजपुरी भाषा का व्यापक प्रचलन है. 

 

डॉ. हरिश बुद्धू के प्रयास से स्कूलों की स्थापना हुई

दो नवंबर को मॉरीशस में अप्रवासी दिवस मनाया जाता है. अप्रवासी घाट यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. इस तरह बड़कागांव प्रखंड के सिमरातरी गांव से निकलकर मॉरीशस का नेतृत्व करना बड़कागांव के लोगों के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है.

 

जब पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ. हरिश बुद्धू 1991 में अपने पैतृक गांव सिमरातरी पहुंचे थे, उस समय शिक्षा की काफी कमी थी. उनके प्रयासों से सिमरातरी और गंगादोहर गांव में बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्कूलों की स्थापना की गई.

 

कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला और युवाओं में जागरूकता व आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हुई. करीब 35 वर्ष बाद उनकी बेटी और दामाद ने सिमरातरी गांव पहुंचकर लोगों का उत्साह बढ़ाया है.

 

मौके पर ये रहे मौजूद

इस अवसर पर मुखिया लीलावती कुमारी, अजीत कुमार, पूर्व मुखिया अशोक कुमार, खेमलाल महतो, ग्राम उपाध्यक्ष दिलीप कुमार, सचिव कमल कुमार, कोषाध्यक्ष सिकंदर महतो, ईश्वरी महतो कैलाश महतो दौलत महतो ,दीपक महतो, अशोक महतो ,सुरेंद्र प्रसाद दांगी, अरुण महतो, रामू महतो, तिला महतो,कंचन महतो, चंद्रिका महतो चिंतामणि महतो सुभद्रा कुमारी पूनम कुमारी सहित भारी संख्या में ग्रामीण महिला पुरुष एवं बच्चे शामिल थे.

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