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फार्मेसी काउंसिल मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की फाइल विभाग ने दबाई

Ranchi : झारखंड राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार और सदस्य के खिलाफ जालसाजी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा से संबंधित फाइल विभाग में दबा दी गयी है. जांच के बाद रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय और सदस्य धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गयी थी. इन दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ जालसाजी करने के आरोप लगाये गये थे.
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Ranchi : झारखंड राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार और सदस्य के खिलाफ जालसाजी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा से संबंधित फाइल विभाग में दबा दी गयी है. जांच के बाद रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय और सदस्य धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गयी थी.
इन दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ जालसाजी करने के आरोप लगाये गये थे. इन आरोपों की जांच सहायक निदेशक औषधि के स्तर से जांच करायी गयी. जांच में इन दोनों ही पदाधिकारियों पर लगाये गये आरोपों की पुष्टि हुई. जांच में पाया गया कि वह एक ही साथ अनेक संस्थानों में कार्यरत हैं.

इन संस्थानों में कांके रोड स्थित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र, हजारीबाग स्थित लाइफ केयर मेडिकल का नाम शामिल है. जांच में पाया गया कि प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र में उनके योगदान की तिथि 7-8-2019 और त्याग पत्र देने की तिथि 11-10-2024 है. लाइफ केयर में योगदान की तिथि 16-7-2016 और त्यागपत्र देने की तिथि 5-8-2024 है.

 

 

ढोरी स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जनऔधषि केंद्र का लाइसेंस प्रशांत कुमार पांडेय के नाम पर जारी किया गया था. इसके अलावा रामगढ़, नईसराय स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जनऔधषि केंद्र सहित कुछ अन्य दवा दुकानों का लाइसेंस भी प्रशांत कुमार पांडेय के नाम पर जारी किया गया था. इससे इस यह पता चलता है कि प्रशांत कुमार पांडेय एक साथ कई कई दुकानों में कार्यरत थे. यह फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 का उल्लंघन है.

 

 जांच के दौरान प्रशांत कुमार द्वारा फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर के उपयोग का मामला भी पकड़ में आया.  जांच के दौरान रजिस्ट्रेशन नंबर JH/00083 और JH/20564/83 को अदलाबदली कर दोहरी नौकरी को छिपाया. इसके अलावा त्याग पत्र देने के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर JH/20564/83 को धोखाधड़ी कर फिर से सक्रिय किया गया. जांच के दौरान प्रशांत पांडेय के शैक्षणिक प्रमाण को संदेहास्पद माना गया. जांच अधिकारी ने वैध डिप्लोमा या डिग्री के बिना किये गये रजिस्ट्रेशन को अवैध करार दिया.

 

 जांच के दौरान धर्मेंद्र सिंह फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के एक्जिक्यूटिव मेंबर है. वह झारखंड फार्मेसी काउंसिल के सदस्य हैं. साथ ही आदित्यपुर के पद्मा मेडिकल में कार्यरत भी थे. धर्मेंद्र ने 8-3-2025 को पदमा मेडिकल से त्यागपत्र दिया. जांच अधिकारी से मिली रिपोर्ट की समीक्षा के बाद इन दोनों ही पदाधिकारियों के खिलाफ जालसाजी और धोखधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की गयी थी. लेकिन अपरिहार्य कारणों से स्वास्थ्य विभाग में यह फाइल दबा दी गयी है.

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