Search

 
 
 

उपायुक्त के नाम पर 40 हजार रुपये घूस मांगनेवाले कर्मचारी की मौज

उपायुक्त ने नाम पर घूस मांगनेवाले राजस्व उप-निरीक्षक की मौज है. घूस मांगने की शिकायत पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. 48 घंटे के अंदर जवाब नहीं देने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गयी. लेकिन एक महीने के अंदर ही उसे जिले के महत्वपूर्ण अंचल में पदस्थापित कर दिया गया. यह मामला बोकारो जिला का है.
 

Ranchi :  उपायुक्त ने नाम पर घूस मांगनेवाले राजस्व उप-निरीक्षक की मौज है. घूस मांगने की शिकायत पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. 48 घंटे के अंदर जवाब नहीं देने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गयी. लेकिन एक महीने के अंदर ही उसे जिले के महत्वपूर्ण अंचल में पदस्थापित कर दिया गया. यह मामला बोकारो जिला का है.

 

जानकारी के मुताबिक, रविंद्रनाथ पात्रो जिले के चंदनकियारी अंचल कार्यालय में उप-निरीक्षक के पद पर पदस्थापित थे. चंदनकियारी में म्यूटेशन के लिए पात्रो पर 23 हजार रुपये नकद लेने और उपायुक्त के नाम पर 40 हजार रुपये घूस मांगने का आरोप लगा. इस सिलसिले में शिकायत मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में पात्रो को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. 

 

अपर समाहर्ता के हस्ताक्षर से जारी कारण बताओ नोटिस मे यह कहा गया कि विजय प्रसाद गोराई ने अपने पत्र में म्यूटेशन के लिए घूस देने का उल्लेख किया है. इसमें कहा गया है कि विजय गोराई ने चंदनकियारी अंचल के मौजा बरमसिया में 33 डिसमिल जमीन खरीदी है. जमीन का खाता नंबर 67 और प्लॉट नंबर 1441 है. विजय गोराई ने लिखा है कि आपने (रविंद्र पात्रो) ने म्यूटेशन के लिए विजय गोराई से 23 हजार रुपये नकद लिया है. साथ ही उपायुक्त के नाम पर 40 हजार रुपये की मांग की है.

 

शिकायती पत्र में वर्णित आरोप गंभीर प्रकृति का है. यह विभागीय काम में आपकी लापरवाही और भ्रष्टाचार में लिप्त होने की तरफ इशारा करता है. आप 48 घंटा के अंदर अपना जवाब देना सुनिश्चित करें. अपर समाहर्ता द्वारा जारी पत्र में उप निरीक्षक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गयी.  हालांकि उप निरीक्षक को चेतावनी दिये जाने के बाद उसे जिले के बड़े और महत्वपूर्ण अंचल में पदस्थापित कर दिया गया. जिला प्रशासन ने 17 नवंबर को आदेश जारी कर इस राजस्व उप निरीक्षक को चास अंचल में पदस्थापित किया है. 

 

उल्लेखनीय है कि 17 नवंबर को ही जारी तबादला आदेश के सहारे आयकर जांच की दायरे में फंसे DMFT के अपर डिविजन क्लर्क राजेश पांडेय को फिर से DMFT में पदस्थापित कर दिया गया था. लेकिन इससे संबंधित समाचार प्रकाशित होने के बाद DMFT में उसके पदस्थापन को रद्द कर दिया गया था. पुलिस द्वारा राजेश पांडे की गाड़ी से 51 लाख रुपये नकद जब्त करने के बाद उसे DMFT से हटाया गया था.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही