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अतिक्रमण तो हट जाएगा, उनका क्या जिन्होंने जिंदगी भर की कमाई खर्च कर फ्लैट खरीदे

खरीदार दिनेश सिंह और महेश मेहता

Ranchi : रांची के बरियातु स्थित डीआईजी ग्राउंड के पास रिम्स द्वारा अधिग्रहित जमीन पर बने एक चार मंजिला अपार्टमेंट को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

 

अपार्टमेंट को ऊपर से मजदूरों की मदद से तोड़ा जा रहा है. इस इमारत में रहने की तैयारी कर रहे फ्लैट खरीदारों के लिए यह कार्रवाई किसी सदमे से कम नहीं है.

 

जानकारी के अनुसार, इस अपार्टमेंट में कुल 15 लोगों ने फ्लैट खरीदे थे और कुछ ही दिनों में यहां शिफ्ट होने वाले थे. किसी ने 50 लाख, किसी ने 70 लाख तो किसी ने 90 लाख रुपये तक खर्च कर अपने सपनों का घर खरीदा था. अब वे अपनी आंखों के सामने अपने घर को टूटते हुए देख रहे हैं.

 

फ्लैट खरीदार दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने 3 बीएचके फ्लैट के लिए कुल 90 लाख रुपये खर्च किए थे. इसमें से 50 लाख रुपये कोटक महिंद्रा बैंक से लोन लिया था और करीब 20 लाख रुपये इंटीरियर पर लगाए थे. इंटीरियर का काम पूरा हो चुका था और कुछ सामान भी फ्लैट में रख दिया गया था. लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो रहा है.

 

दिनेश सिंह का कहना है कि फ्लैट खरीदने से पहले उन्होंने बिल्डर द्वारा दिए गए सभी कागजात अपने वकील से जांच कराई थी. सीओ से वेरिफिकेशन कराया गया, रेरा में भी प्रोजेक्ट वैध बताया गया और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने लोन पास किया. इसके बावजूद अब अपार्टमेंट को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है.

 

सभी फ्लैट खरीदार इस मामले को लेकर हाई कोर्ट गए, जहां बताया गया कि जमीन के मालिक को मुआवजा दिया जा चुका है और रिम्स को अधिकार है कि वह जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराए. खरीदारों का आरोप है कि हाई कोर्ट ने उनकी बात नहीं सुनी और सीओ को जल्द से जल्द मशीनों से अपार्टमेंट गिराने का निर्देश दे दिया.

 

खरीदारों का सवाल है कि जब जमीन पहले से रिम्स द्वारा अधिग्रहित थी, तो निर्माण के समय इसे क्यों नहीं रोका गया. रेरा ने कैसे मंजूरी दी, नक्शा कैसे पास हुआ, सीओ ने जांच में इसे अवैध क्यों नहीं बताया और बैंक ने लोन कैसे दे दिया. इन सभी सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं.

 

खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में भी आवेदन दिया है. बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट दो दिन बाद फैसला सुनाएगी, हालांकि अभी कोई स्टे ऑर्डर नहीं मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट से भी जानकारी मांगी है.

 

एक अन्य खरीदार महेश कुमार मेहता ने बताया कि उन्होंने 50 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा था. फ्लैट पूरी तरह तैयार था और दो महीने में परिवार के साथ गृह प्रवेश करने वाले थे. अब उनका सपना अधूरा रह गया है. उनका कहना है कि उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही.

 

फ्लैट खरीदारों का आरोप है कि न तो सरकार और न ही बिल्डर की ओर से कभी यह बताया गया कि अपार्टमेंट अवैध जमीन पर बना है. सभी दस्तावेज सही बताए गए थे. इसके बावजूद अब उनके जीवन भर की कमाई एक झटके में खत्म होतीदिख रही है.

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