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उत्पाद विभाग ने वित्त विभाग से ऑडिटर मांगे

उत्पाद विभाग ने शराब दुकानों को अपने कब्जे में लेने के लिए वित्त विभाग से ऑडिटर्स की मांग की है. जुलाई से राज्य में नयी उत्पाद नीति लागू की जानी है.
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Ranchi: उत्पाद विभाग ने शराब दुकानों को अपने कब्जे में लेने के लिए वित्त विभाग से ऑडिटर्स की मांग की है. जुलाई से राज्य में नयी उत्पाद नीति लागू की जानी है. नयी नीति में दुकानों की नीलामी का प्रावधान है. फिलहाल इन दुकानों को प्लेसमेंट एजेंसियों के सहारे झारखंड बिवरेजेज कॉरपोरेशन द्वारा चलाया जा रहा है.


वित्तीय वर्ष 2022-23 में लागू उत्पाद नीति में राज्य सरकार द्वारा ही खुदरा शराब दुकानों के माध्यम से शराब बेचने का प्रावधान है. इस प्रावधान के आलोक में राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेश द्वारा प्लेसमेंट एजेंसियों के सहारे खुदरा शराब दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री की जाती है. 
अलग-अलग प्लेसमेंट एजेंसियों को 1453 खुदरा शराब दुकानों को चलाने की जिम्मेवारी दी गयी है. इन प्लेसमेंट एजेंसियों ने शराब की बिक्री से मिली पूरी रकम कॉरपोरेशन के खाते में जमा नहीं की है. इन एजेंसियों पर करीब 100 करोड़ रुपये के बकाये का अनुमान है. 


जुलाई 2025 से लागू होने वाली नयी उत्पाद नीति में खुदरा दुकानों की नीलामी का नियम है. दुकानों की नीलामी जिले के उपायुक्त के माध्य से की जायेगी. दुकानों की नीलामी के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों को दी गयी दुकानों को वापस लेना है. 


लेकिन प्लेसमेंट एजेंसियों पर बकाया रकम को देखते हुए दुकानों के हस्तांतरण के समय ऑडिटरों को रखने का फैसला किया गया है. उत्पाद विभाग ने मुख्यालय और जिला स्तर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट को सूचीबद्ध कर रखा है. लेकिन शराब दुकानों के हस्तांतरण के समय चार्टर्ड अकाउंटेंट के बदले वित्त विभाग के ऑडिटरों से काम लेने का फैसला किया गया है.

 

 

 

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