- पलामू टाइगर रिजर्व में गई दो गांवों की जमीन
- ग्रामीणों को दूसरे गांव में बसाया गया
- जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलने पर HC में PIL
- HC में राज्य सरकार ने बताया, 4 महीने का लगेगा समय
- कैबिनेट में लिया गया है ग्रामीणों को जमीन की रसीद देने का फैसला
Ranchi News: झारखंड में बाघों के संरक्षण को लेकर विकास महतो की जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में बुधवार को हुई. मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पलामू टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट के तहत दो गांवों से विस्थापित किए गए ग्रामीणों को दूसरे गांव में पुनर्वासित किया गया था, उन्हें जमीन की रसीद देने को लेकर कैबिनेट की बैठक में सहमति बन गई है.
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कैबिनेट ने इन दो विस्थापित ग्रामीण को म्यूटेशन सेटलमेंट रिकॉर्ड देने का निर्णय लिया है, लेकिन इसमें 4 माह का समय लगेगा. कोर्ट ने सरकार को समय प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर निर्धारित की. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.
उल्लेखनीय है कि पलामू रिजर्व टाइगर प्रोजेक्ट में दो गांवों (कुजरुम और जयगीर) के लोगों को दूसरे गांव पोलपोल में पुनर्वासित किया गया है. पलामू टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट के विस्थापित इन लोगों को राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई गई जमीन की रसीद नहीं कट रही है, जिससे उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है.
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