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पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक-2022 को राज्यपाल ने दी स्वीकृति

Ranchi: राज्यपाल रमेश बैस ने मंगलवार को पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक, 2022 को स्वीकृति दे दी है. यह विधेयक बीते मॉनसून सत्र 2022 में झारखंड विधानसभा से पारित हुआ था. इसके साथ ही पूर्वी भारत का पहला जनजातीय विश्वविद्यालय खोले जाने का रास्ता साफ हो गया है. अभी जनजातियों के लिए देश में पहला विश्वविद्यालय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के अमरकंटक में चल रहा है. इसे भी पढ़ें-साहिबगंज">https://lagatar.in/sahibganj-organized-disability-checkup-camp-at-borio-brc-building/">साहिबगंज

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इससे पहले बीते साल शीतकालीन सत्र 2021 में यह विधेयक झारखंड विधानसभा से पारित हुआ था. हालांकि राज्यपाल ने इस विधेयक के हिंदी और अंग्रेजी भाषा में अंतर होने की बात करते हुए विधेयक को वापस लौटा दिया था. इसके बाद दोबारा राज्य सरकार ने विधेयक को 2022 के नाम से विधान सभा से पास कराने की स्वीकृति कैबिनेट से ली थी. जिसके बाद मॉनसून सत्र 2022 में विधेयक पास कराया गया था. इसे भी पढ़ें-दादा-दादी">https://lagatar.in/grand-parents-day-celebrated-in-vidya-vikas-public-school-in-honor-of-grandparents/">दादा-दादी

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पंडित रघुनाथ मुरमू जनजाति विश्वविद्यालय का मुख्यालय जमशेदपुर होगा. इस विधेयक का क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण राज्य में होगा. जरूरत के हिसाब से किसी भी जिले में रीजनल सेंटर खोला जा सकेगा. सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालय निर्माण का उद्देश्य जनजातीय भाषा और आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा को सहजना है. साथ ही इस परंपरा पर शोध करने तथा आदिवासी समाज के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा पाएगा. विश्वविद्यालय के खुलने से झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के छात्रों को भी लाभ मिलेगा. [wpse_comments_template]  

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