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HC ने निदेशक से पूछा- CIP की भूमि पर भविष्य में अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं

झारखंड हाई कोर्ट ने C.I.P., कांके की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने C.I.P. के निदेशक को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर शपथ-पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि C.I.P की भूमि में भविष्य में अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उठाए जाने प्रस्तावित हैं?
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Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने C.I.P., कांके की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने C.I.P. के निदेशक को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर शपथ-पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि C.I.P की भूमि में भविष्य में अतिक्रमण न हो इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उठाए जाने प्रस्तावित हैं? 

 

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने C.I.P., कांके की भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित याचिकाकर्ता विकास चंद्र की जनहित याचिका पर सुनवाई की.

 

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि पहले से हुए C.I.P. की जमीन पर अतिक्रमण की जांच चल रही है, लेकिन यदि नए अतिक्रमण भी हो रहे हों तो यह आश्चर्यजनक नहीं होगा. इसलिए निदेशक की जवाबदेही तय की गई है. मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी.

 

इससे पहले मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत गठित समिति अब तक सर्वे कार्य पूरा नहीं कर सकी है.

 

बताया गया कि C.I.P. द्वारा आवश्यक दस्तावेज हाल ही में उपलब्ध कराए गए हैं, जो काफी पुराने हैं, इसलिए रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय मांगा गया. खंडपीठ ने कहा कि C.I.P. और राज्य सरकार को समन्वय के साथ काम कर C.I.P. को हस्तांतरित भूमि पर हुए अतिक्रमण की पूरी स्थिति स्पष्ट करनी होगी.

 

कोर्ट ने पहले ही पर्याप्त समय दिए जाने का उल्लेख करते हुए अंतिम अवसर के रूप में समिति को 31 मार्च 2026 तक रिपोर्ट दाखिल करने की मोहलत दी. साथ ही निर्देश दिया गया कि समिति 8 अप्रैल 2026 तक उपायुक्त के माध्यम से रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें.

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