Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

HC ने बोकारो की 14 वर्षीय लापता बच्ची मामले में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में बोकारो की एक 14 वर्षीय लापता बच्ची से संबंधित मामले की सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की. खंडपीठ ने एडीजी, सीआईडी को व्यक्तिगत रूप से कल यानी 9 जून को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 9 जून को होगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की ने पक्ष रखा.
Advertisement
Advertisement
  • एडीजी, सीआईडी को किया तलब 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में बोकारो की एक 14 वर्षीय लापता बच्ची से संबंधित मामले की सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की. खंडपीठ ने एडीजी, सीआईडी को व्यक्तिगत रूप से कल यानी 9 जून को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 9 जून को होगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की ने पक्ष रखा. 

 

दरअसल, बच्ची 16 अक्टूबर 2020 से लापता है. पिंडराजोरा थाना, बोकारो में एफआईआर दर्ज हुई थी. जांच के दौरान पुलिस की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण  का मामला माना गया. घटनास्थल के पास बच्ची की साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं.

 

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में टिप्पणियां पाया कि जांच सही दिशा में नहीं बढ़ी. एक संदिग्ध रहमाली अंसारी का नार्को-एनालिसिस टेस्ट मेडिकल अनफिटनेस के कारण नहीं हो पाया, लेकिन बाद में उसका टेस्ट कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया. 21 सितंबर 2022 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार आरोपियों के नार्को टेस्ट की अनुमति दी थी. तीन आरोपियों का टेस्ट हुआ, लेकिन चौथे आरोपी का नहीं हुआ. अदालत ने कहा कि आदेश का "पूर्ण अनुपालन" नहीं किया गया.

 


खंडपीठ ने सीआईडी की जांच पर भी सवाल उठाया. कहा कि 20 अप्रैल 2026 को जांच सीआईडी को सौंपी गई. अदालत ने सीआईडी की केस डायरी देखने के बाद पाया कि नई जांच के बजाय केवल पुराने गवाहों के बयान दोहराए गए हैं. कोई महत्वपूर्ण नई प्रगति नहीं हुई. कोर्ट ने कहा कि लापता नाबालिग बच्ची के मामलों में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. देरी बढ़ने से बच्ची के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी बढ़ती है.

 

कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता है तो वह किसी केंद्रीय एजेंसी की सहायता लेने पर विचार करेगी ताकि राज्य पुलिस और सीआईडी उसके पर्यवेक्षण में काम करें. सुनवाई में भी कोर्ट ने पाया कि सीआईडी द्वारा कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है. इसलिए मामला केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की संभावना पर विचार किया गया.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही