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झारखंड में ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीदें

East Singhbhum : झारखंड के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिलने के लिए एक अभिनव पहल की गई है. 

 

यह पहल ‘ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क’ (जीपीएचडी) के रूप में सामने आई है जो अब राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले के तीन प्रमुख ब्लॉकों – पटमदा, बोराम और गुरबंधा – में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है. 

 

इन हेल्प डेस्क्स का उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं जैसे मनरेगा, पेंशन, आवास योजनाओं आदि की जानकारी और सहायता प्रदान करना है.

 

टीएसआरडी और प्रदान का सहयोग

टीएसआरडी (टैगोर सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट) द्वारा संचालित यह पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम के हिस्से के रूप में शुरू की गई है.

 

 इस पहल का संचालन ‘कॉमन ग्राउंड इनीशिएटिव’ और प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) के सहयोग से हो रहा है. इन संगठनों ने ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, रिकॉर्ड-कीपिंग और सामुदायिक आउटरीच रणनीतियां विकसित की हैं.

 

समुदाय का विश्वास और समय की बचत

इस मॉडल ने ग्रामीणों के बीच विश्वास पैदा किया है और उन्हें सरकारी सेवाओं का लाभ सीधे बिना किसी बिचौलिये के मिल रहा है. टीएसआरडी के संयुक्त सचिव नंदलाल बख्शी के अनुसार अब ग्रामीणों को आधार सुधार या मनरेगा मजदूरी के लिए किसी को भुगतान नहीं करना पड़ता जिससे पैसे और समय की बचत हो रही है.

 

जीपीएचडी का संचालन स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा किया जाता है जो इन हेल्प डेस्क्स के जरिए ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देती हैं.

 

महिलाओं को मिल रहा सशक्तिकरण का अवसर

इस पहल का विशेष ध्यान महिलाओं पर है. स्थानीय महिला सहायिकाओं की मदद से ग्रामीण महिलाएं अब आसानी से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रही हैं.

 

मंदा देवी एक जीपीएचडी सहायिका ने कहा पहले महिलाओं को सरकारी कामकाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या मुखिया का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब वे सीधे हमारे पास आती हैं और आत्मविश्वास से अपनी समस्याओं का समाधान करवा रही हैं.

 

राज्यव्यापी विस्तार की योजना

झारखंड सरकार ने जनवरी 2024 में इस पहल को राज्यभर में लागू करने का निर्णय लिया है. इसके तहत अब सभी 4,246 पंचायतों में जीपीएचडी अनिवार्य कर दी गई हैं जिससे राज्यभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी.

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