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बादम राजा-रानी के सुहागरात की गवाह है इस्को की रहस्यमयी गुफा

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कोयला खनन से नष्ट होने का मंडरा रहा खतरा Hazaribagh (Amarnath Pathak ): हजारीबाग प्रमंडलीय मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर बड़कागांव स्थित इस्को गुफा अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है. इसका इस्तेमाल बादम के राजा किया करते थे. स्थानीय लोगों की मानें तो जब राजा की शादी हुई थी, तब इस गुफा के पास उन्होंने रानी के साथ सुहाग रात मनाई थी. यही वजह है कि गुफा के चट्टानों पर आज भी कोहबर कला की झलक स्पष्ट दिखाई देती है. कलाकृतियों के जानकार इसे इस्को रॉक आर्ट का नाम देते हैं. इस्को गुफा के बारे में बताया जाता है कि यह पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है. हजारीबाग में कई गुमनाम ऐतिहासिक धरोहरों में इस्को रॉक आर्ट और केव (गुफा) भी शामिल है. वर्षों से यह गुमनामी के अंधेरे में पड़ा हुआ है. बड़कागांव स्थित इस्को गुफा अपने अंदर कई ऐतिहासिक कहानियां छुपाए हुए है. प्रसिद्ध मेगालिथ खोजकर्ता और शोधकर्ता शुभाशीष दास कहते हैं कि सरकार के स्तर पर इसको संरक्षित करने के लिए अब तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ है. इतिहास से जुड़े धरोहर एन अमेचर्स क्लब के अध्यक्ष अभिषेक मिश्र इसको लेकर चिंता जताते हैं. उनका कहना है कि इलाके में कोयला खनन का काम चल रहा है, जिसके लिए विस्फोट किए जाते हैं. इससे इस गुफा को नुकसान पहुंच रहा है. यहां इस्को गुफा की चट्टानों पर अंकित कोहबर कला नष्ट हो रही है. [caption id="attachment_396038" align="alignleft" width="551"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/cave-506x375.jpg"

alt="इस्को की रहस्यमयी गुफा" width="551" height="409" /> इस्को की रहस्यमयी गुफा[/caption] प्रसिद्ध पर्यावरणिविद् पद्मश्री बुलू इमाम भी जता चुके हैं फिक्र पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और इतिहासकार बुलू इमाम भी नष्ट होते रॉक आर्ट को लेकर चिंता जता चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस्को गुफा का इतिहास काफी पुराना है. इसमें बनी रॉक पेंटिंग हमारी परंपरा और संस्कृति को दर्शाते हैं. इसलिए इस गुफा के संरक्षण को लेकर सार्थक प्रयास होना चाहिए. बुलू इमाम की मानें तो गुफा की चट्टानों पर अंकित कोहबर कला आज भी उपेक्षित है. ग्रामीणों की मांग, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गुफा स्थानीय निवासी वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि इस क्षेत्र को अगर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक यहां आएंगे. गुफा और आसपास के क्षेत्र के विकास से न सिर्फ पर्यटकों को झारखंड के इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इस्को गुफा जिन पहाड़ियों के बीच स्थित है, वहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. जरूरत है, बस इस क्षेत्र को विकसित करने और नई पहचान दिलाने की. इसके लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पहल करनी होगी. इसे भी पढ़ें- BIG">https://lagatar.in/big-breaking-three-people-of-same-family-murdered-in-khunti/">BIG

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