alt="इस्को की रहस्यमयी गुफा" width="551" height="409" /> इस्को की रहस्यमयी गुफा[/caption] प्रसिद्ध पर्यावरणिविद् पद्मश्री बुलू इमाम भी जता चुके हैं फिक्र पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और इतिहासकार बुलू इमाम भी नष्ट होते रॉक आर्ट को लेकर चिंता जता चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस्को गुफा का इतिहास काफी पुराना है. इसमें बनी रॉक पेंटिंग हमारी परंपरा और संस्कृति को दर्शाते हैं. इसलिए इस गुफा के संरक्षण को लेकर सार्थक प्रयास होना चाहिए. बुलू इमाम की मानें तो गुफा की चट्टानों पर अंकित कोहबर कला आज भी उपेक्षित है. ग्रामीणों की मांग, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गुफा स्थानीय निवासी वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि इस क्षेत्र को अगर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक यहां आएंगे. गुफा और आसपास के क्षेत्र के विकास से न सिर्फ पर्यटकों को झारखंड के इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इस्को गुफा जिन पहाड़ियों के बीच स्थित है, वहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. जरूरत है, बस इस क्षेत्र को विकसित करने और नई पहचान दिलाने की. इसके लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पहल करनी होगी. इसे भी पढ़ें- BIG">https://lagatar.in/big-breaking-three-people-of-same-family-murdered-in-khunti/">BIG
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