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रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट का रास्ता साफ, 9 जनवरी को अहम बैठक

Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है. 

 

इसके साथ ही राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी चरणबद्ध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है. इस पहल से झारखंड के किडनी रोगियों को राज्य से बाहर इलाज कराने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है.

 

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के उप सचिव ध्रुव प्रसाद द्वारा इस संबंध में पत्र जारी किया गया है. पत्र के अनुसार 9 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11.30 बजे एक महत्वपूर्ण एडवायजरी कमिटी की बैठक आयोजित की जाएगी. 

 

यह बैठक अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में होगी. बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाएगी.

 

बैठक में फिलहाल रांची के दो अस्पतालों, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स और राज हॉस्पिटल, रांची को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण और लाइसेंस दिए जाने पर विचार किया जाएगा. इन अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और मानकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.

 

स्वास्थ्य विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से पहले निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति का गठन किया जाता है.

 

यह समिति संबंधित अस्पताल का स्थल निरीक्षण कर वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक और अन्य आवश्यक संसाधनों का विस्तृत आकलन करती है. निरीक्षण के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है.

 

तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर एडवायजरी कमिटी यह निर्णय लेती है कि संबंधित अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए निर्धारित सभी मानकों और अर्हताओं को पूरा करता है या नहीं.

 

सभी शर्तें पूरी होने की स्थिति में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में अंतिम निर्णय लिया जाता है और अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है.

 

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इससे न केवल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा, बल्कि झारखंड में उन्नत चिकित्सा सेवाओं का विस्तार भी होगा.

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