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झारखंड में PDS सिस्टम पर संकट, 11 महीने से नहीं मिल रही जरूरी चीजें

झारखंड की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इन दिनों गंभीर भरोसे के संकट से गुजर रही है. राज्य के लाखों गरीब परिवारों को पिछले करीब 11 महीनों से चीनी, दाल और नमक जैसी जरूरी खाद्य सामग्री नहीं मिल पाई है
 

Ranchi : झारखंड की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इन दिनों गंभीर भरोसे के संकट से गुजर रही है. राज्य के लाखों गरीब परिवारों को पिछले करीब 11 महीनों से चीनी, दाल और नमक जैसी जरूरी खाद्य सामग्री नहीं मिल पाई है. हालात यह है कि रसोई का बजट बिगड़ गया है और लोग सरकारी राशन व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे हैं.

 

हालांकि विभाग की ओर से संकेत दिए गए हैं कि दाल और नमक की आपूर्ति जल्द शुरू हो सकती है, लेकिन चीनी को लेकर स्थिति अब भी अधर में लटकी हुई है. लगातार टेंडर प्रक्रिया विफल होने के कारण चीनी वितरण ठप पड़ा है.

 

दाल-नमक की उम्मीद, चीनी पर संकट

खाद्य आपूर्ति विभाग के मुताबिक, दाल की खरीद प्रक्रिया अब अंतिम दौर में है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार, रहा तो 10 दिनों के भीतर दाल पीडीएस दुकानों तक पहुंच सकती है. नमक को लेकर भी किसी बड़ी अड़चन की बात सामने नहीं आ रही है.

 

लेकिन चीनी सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है. बीते चार–पांच महीनों में तीन बार टेंडर निकाले गए, मगर हर बार कोई भी आपूर्तिकर्ता आगे नहीं आया. नतीजतन अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के लाखों परिवार चीनी से वंचित हैं. राज्य में करीब 8.8 लाख AAY कार्डधारी परिवार हैं, जिनसे जुड़े 33 लाख से अधिक लाभुक प्रभावित हो रहे हैं.

 

सरकार विकल्प तलाश रही


सूत्रों की मानें तो दाल और नमक का रास्ता साफ हो चुका है, जबकि चीनी के लिए नए विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. विभाग ने इस समस्या को उच्च स्तर पर रख दिया है ताकि जल्द समाधान निकाला जा सके.

 

डीलरों की भी बढ़ी मुश्किल

इधर पीडीएस दुकानदारों की परेशानी भी कम नहीं है. आठ महीने से कमीशन का भुगतान नहीं होने के कारण कई दुकानदार आर्थिक संकट में हैं. कुछ डीलरों का तो 13–15 महीने तक का कमीशन लंबित बताया जा रहा है. इससे पीडीएस की जमीनी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

 

व्यवस्था पर सवाल

खाद्य सामग्री की कमी और डीलरों के भुगतान में देरी ने यह साफ कर दिया है कि पीडीएस सिर्फ आपूर्ति का नहीं, बल्कि प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का भी संकट झेल रहा है. अब देखना यह है कि सरकार इस भरोसे को कितनी जल्दी बहाल कर पाती है.

 

 

 


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