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पलामू : पशु चिकित्सा वाहन की सेवाएं ठप होने से बढ़ी पशुपालकों की परेशानी

जिले में संचालित चलंत पशु चिकित्सा वाहन की सेवाएं रुकने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालकों की परेशानियां बढ़ गई हैं. अपने 4 महीने से लंबित मानदेय को लेकर चलंत पशु चिकित्सा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. ग्रामीण क्षेत्र में बरसात के दिन होने के कारण पशुओं को होने वाली बीमारियां बढ़ जाती है.
 

Palamu : जिले में संचालित चलंत पशु चिकित्सा वाहन की सेवाएं रुकने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालकों की परेशानियां बढ़ गई हैं. अपने 4 महीने से लंबित मानदेय को लेकर चलंत पशु चिकित्सा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. ग्रामीण क्षेत्र में बरसात के दिन होने के कारण पशुओं को होने वाली बीमारियां बढ़ जाती है.

 

हड़ताल के कारण पशुओं के इलाज में पशुपालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि इन वाहनों का संचालन करने वाली कंपनी का तर्क है कि उसे सरकार से अब तक राशि नहीं प्राप्त हुई है, जिस कारण कर्मियों को मानदेय देने में असुविधा हो रही है.


14 पशु चिकित्सा वाहन वर्तमान में संचालित

 

बताते चलें कि डायल 108 की तर्ज पर चिकित्सा पशु वाहन की शुरुआत की गई थी. जिसका संचालन पूरे राज्य में ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज द्वारा किया जाता है. इसके तहत पलामू जिले में 14 वाहन प्रदान किए गए थे.

 

इनमें ड्राइवर के अलावा पारा वेट तथा पशु चिकित्सक तैनात होते थे. हालांकि वर्तमान में सदर प्रखंड, चैनपुर, विश्रामपुर लेस्लीगंज तथा हरिहरगंज प्रखंड को निर्गत चिकित्सालय में पांच पशु चिकित्सक ही अपनी सेवा दे रहे थे.

 

1962 डायल कर घर बैठे पशुओं का इलाज

 

चलंत पशु चिकित्सालय को लेकर 2021 में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को विशेष लाभ देने के लिए कार्य योजना बनाई गई थी. हालांकि इसके 3 वर्ष बाद 2024 के सितंबर महीने में पूरे राज्य में 236 चलंत पशु चिकित्सा वाहन की शुरुआत की गई थी. इसके तहत एंबुलेंस कॉल सेंटर के माध्यम से संचालित होने वाले इस सेवा का लाभ लेने के लिए पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 डायल करते हैं. इसके बाद उनसे जानकारी प्राप्त कर वहां द्वारा घर पहुंच कर इलाज किया जाता है. इसकी शुरुआत होने से पशुपालकों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता था.

 

चार महीने से ड्राइवर, पारा वेट व पशु चिकित्सक के मानदेय लंबित

 

बताते चलें कि मोबाइल चलंत पशु चिकित्सा वाहन में तैनात चिकित्सक को मानदेय के रूप में 45 हजार रुपए दिए जाते हैं. वहीं ड्राइवर तथा पारा वेट को 12–12 हजार रुपए मानदेय के तौर पर मिलते हैं. इन कर्मियों का मानदेय बीते मई महीने से लंबित है. जिले में अपनी सेवा देनेवाले पारा वेट तथा ड्राइवर के 13 लाख 44 हजार व पशु चिकित्सकों के करीब नौ लाख रुपए लंबित हैं.

 

ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज कंपनी के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर देवेश पांडेय ने बताया कि कंपनी को सरकार द्वारा अब तक राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है. बीते 9  महीने किसी तरह कंपनी ने कर्मियों का भुगतान किया परंतु आगे इसे देने में असमर्थ है.

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