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ब्रिटिश काल में महज 6 हजार में बना था चक्रधरपुर का लाल गिरजाघर

Chakradharpur (Shambhu Kumar): पश्चिमी सिंहभूम जिले में क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो गई है. जिले के चाईबासा,चक्रधरपुर,मनोहरपुर,बंदगांव, आनंदपुर व अन्य प्रखंड में हर्षोल्लास के साथ क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है. जिसे लेकर गिरजा घरों की साफ सफाई व साज सज्जा का काम पूरा किया जा रहा है.

 

पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर की पोटका स्थित लाल गिरजा घर में भी क्रिसमस पर बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं. लाल गिरजा घर की स्थापना वर्ष 1896 में हुई थी. ब्रिटिश काल में चक्रधरपुर में मसीही समुदाय के लोगों को प्रार्थना करने के लिए होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए चक्रधरपुर के पोटका में लाल गिरजाघर की स्थापना की गई थी. होली सेविवर चर्च लाल गिरजाघर की आधारशिला उस वक्त के चाईबासा के पादरी लोग्सडेल ने रखी थी.

 

जानकार बताते हैं कि वर्ष 1892-93 में पादरी लोग्सडेल चाईबासा से चक्रधरपुर रेलवे कर्मचारियों के लिए आराधना करने महीने में एक बार आया करते थे. उस वक्त गिरजाघर नहीं होने के कारण आराधना कभी रेलवे स्टेशन मास्टर के कार्यालय, वेटिंग रूम या कभी पोटका के डाकबंगले में की जाती थी. इसी कठिनाई को दूर करने के लिए पादरी लोग्सडेल ने वर्ष 1893 के मई में मिशन हाते की जमीन खरीदी और अस्थायी गिरजाघर और विश्रामगृह बनवाना आरंभ किया. 

 

उस वक्त चक्रधरपुर का लाल गिरजाघर छह हजार रुपये में बनकर तैयार हुआ था.पादरी 1894 में गिरजाघर की नींव रखी, जो 1896 में तैयार हो गया. 20 सितंबर 1896 को आराधना के लिए गिरजाघर खोल दिया गया.उस दिन उस दिन हिन्दी आराधाना में 14 और अंग्रेजी आराधाना में आठ प्रभुभोजी उपस्थित थे.

 


रेलकर्मियों के लिए बना था गिरजाघर


लाल गिरजाघर खासकर एंग्लो इंडियन तथा यूरोपयिन ईसाई रेलकर्मियों के लिए बना था. आरंभ में लोगों के बीच धर्म प्रचार करने की ओर ध्यान नहीं दिया गया. उस वक्त स्थायी रूप से यहां पादरी या प्रचारक नहीं रहा करते थे. आरंभ में स्वयं पादरी लोग्सडेल महीने में एक बार यहां आते थे. 

 

बाद में मनोहरपुर,मुरहू व आद्रा से यहां पादरी आने लगे. प्रथम पादरी के रूप में डीपी मिश्रा यहां रहने के लिए भेजे गये थे. कुछ मिशनरी इससे पहले यहां भेजे गए, जिनमें 1922 में मिस पोप, 1937 ई. में डिकनेस हेलेन स्कोफिल्ड थे. 1938 में प्रचारक जोन लुगुन की नियुक्ति हुई. यहां गिरजाघर बनने से एक लोअर प्राइमरी स्कूल भी खोला गया, जो वर्तमान में भी संचालित है.

 

 

 

 

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