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हातमा सरना स्थल से निकलेगी सरहुल शोभायात्रा, 20-22 मार्च तक तीन दिवसीय महोत्सव

प्रकृति पर्व सरहुल पूजा और आदिवासी आस्था के महापर्व को लेकर हातमा सरना स्थल में आज बुधवार बैठक आयोजित हुई. बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि 20 से 22 मार्च तक सरहुल महोत्सव मनाए जाएंगे. यह तीन दिवसीय कार्यक्रम होगा.
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Ranchi: प्रकृति पर्व सरहुल पूजा और आदिवासी आस्था के महापर्व को लेकर हातमा सरना स्थल में आज बुधवार बैठक आयोजित हुई. बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि 20 से 22 मार्च तक सरहुल महोत्सव मनाए जाएंगे. यह तीन दिवसीय कार्यक्रम होगा. उन्होंने कहा कि हातमा सरना स्थल सरहुल शोभायात्रा का उद्गम स्थल है. यहां से निकलने वाली शोभायात्रा का आकर्षण होगी.


मुख्य पाहन ने बताया कि 20 मार्च को आदिवासी समाज के लोग उपवास रखेंगे. शाम करीब 7.30 बजे पाहन के सहयोगी पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नदी-तालाब से जल लाकर हातमा सरना स्थल में घड़ा में जल रखाई करेंगे. इस दौरान पांच मुरगों की बलि दी जाएगी और देवकुल देवताओं तथा ग्राम देवता का स्मरण कर पूजा-अर्चना की जाएगी. पूजा के बाद पवित्र जल को विभिन्न सरना स्थलों तक ले जाया जाएगा, जहां विधिवत अनुष्ठान संपन्न होगा. 

 

उन्होंने बताया कि चैत तृतीया 21 मार्च को सुबह 10.30 बजे मुख्य पूजा होगी और मौसम की भविष्यवाणी किए जायेंगे. पूजा के बाद बलि दिए गए मुर्गे का प्रसाद तैयार किया जाएगा. इसके बाद दोपहर डेढ़ से दो बजे के बीच हातमा से सरहुल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे. 


महोत्सव के तीसरे दिन 22 मार्च को पाहन के घर से फूलखोंसी की शुरुआत होगी. लोकगीत और पारंपरिक नृत्य के साथ टोली घर-घर जाएगी, जहां फूलखोंसी की रस्म निभाई जाएगी और घर-द्वार की शांति, समृद्धि और मंगलकामना की जाएगी.

 


संवाददाता सम्मेलन में सरहुल के स्वरूप में हो रहे बदलाव पर भी चिंता जताई है. मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने शोभायात्रा में शामिल प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ता से अपील की कि वे निश्चित समय पर सिरमटोली सरना स्थल पहुंचें, ताकि लोग अपने गांव व घर समय पर पहुंच जाए. उन्होंने कहा कि अनुशासन में डीजे का सीमित ध्वनि में उपयोग किया जाए, ताकि पर्व की पारंपरिक गरिमा बनी रहे.

 

उन्होंने यह भी कहा कि अब मूलवासी समाज भी आदिवासी परिधान और संस्कृति को पसंद करने लगा है, जो सांस्कृतिक स्वीकार्यता का सकारात्मक संकेत है. संवाददाता सम्मेलन में जगलाल पाहन, बबलु मुंडा, सुरेंद्र लिंडा, शिवधन मुंडा, अशोक मुंडा, सुरेश मुंडा, राजेश मुंडा, महादेव टोप्पो और शोभा तिर्की समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.

 

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