Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 61 वर्ष करने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर विचार करने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ जिला न्यायिक अधिकारी रंजीत कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की.
याचिका में झारखंड सेवा नियमों में संशोधन कर न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग की गई थी. वर्तमान में झारखंड में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष है.
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि तेलंगाना सहित कई राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष है और सभी राज्यों में समानता (Uniformity) होनी चाहिए.
मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि समानता होनी चाहिए, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सेवानिवृत्ति से ठीक पहले कोई याचिका दायर कर कार्यकाल बढ़ाने की मांग की जाए.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी मांग की गई कि सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियोजन (Re-employment) का निर्देश दिया जाए, क्योंकि देश के 17 राज्यों में इस तरह की व्यवस्था लागू है.
पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना नीति से जुड़ा विषय है, जिसमें कार्यपालिका को निर्णय लेना होता है. इस आधार पर अदालत ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रतिवेदन देने की छूट दी. अदालत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश अन्य राज्यों से जानकारी एकत्र कर, यदि सेवानिवृत्ति आयु में असमानता पाई जाती है, तो राज्य सरकार से प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श कर सकते हैं.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.



Leave a Comment