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नशेड़ी मरीजों के इलाज में होती है परेशानी, जानें रिम्स के डॉक्टर का अनुभव

Ranchi: झारखंड की सड़कों पर जीवन और मौत की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है. सिर्फ जुलाई 2025 में राज्य में सड़क हादसों में 280 लोगों ने अपनी जान गंवा दी.
 

Ranchi: झारखंड की सड़कों पर जीवन और मौत की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है. सिर्फ जुलाई 2025 में राज्य में सड़क हादसों में 280 लोगों ने अपनी जान गंवा दी. इनमें सबसे ज्यादा 39 लोग रांची में मरे, जबकि अन्य जनपदों जैसे हजारीबाग (28), सरायकेला (26), दुमका (21) और गिरिडीह (19) में भी जानलेवा दुर्घटनाएं हुईं.

 

यहां तक कि पुलिस की एक्टिव जांच और जागरूकता कार्यक्रमों, जिनसे लगभग 94,823 लोग जुड़े के बावजूद, सड़क सुरक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा लोग बिना हेलमेट, तेज रफ्तार से बाइक या कार चलाते हैं, बिना ड्राइविंग लाइसेंस, कई बार नशे की हालत में वाहन चलाते पाए जाते हैं. इसी लापरवाही का खामियाजा अस्पतालों में भी डॉक्टरों को उस वक्त भुगतना पड़ता है, जब कोई ड्रिंक एंड ड्राइव का मरीज आपातकालीन वार्ड में इलाज के लिए लाया जाता है.

 

कल्पना कीजिए, एक मरीज का एक्सीडेंट हुआ है, सिर से खून बह रहा है, डॉक्टर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अचानक वही मरीज उठ बैठता है और कहने लगता है, मुझे इलाज नहीं कराना. कभी गाली-गलौज, तो कभी हाथ-पैर पटकना और कभी डॉक्टरों को धक्का देना. 
यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि रांची के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स की हकीकत है, जहां डॉक्टर हर दिन ऐसे मामलों का सामना करते हैं.

 

रिम्स के डॉक्टर पवन बताते हैं, हर दिन हमारे पास एक्सीडेंट के कई केस आते हैं. जब मरीज नशे में होता है, तो उनकी जांच करना बेहद कठिन हो जाता है. कभी टांके लगाने में समस्या आती है, कभी खून रोकने में देर होती है, तो कभी एमआरआई और सीटी स्कैन कराना ही असंभव हो जाता है. कई बार हमें इलाज शुरू करने से पहले आधे घंटे तक मरीज का काउंसिलिंग करना पड़ता है, जिससे समय बर्बाद होता है और जान का खतरा और बढ़ जाता है.

 

डॉ. अंकिता टुडु का अनुभव और भी चौंकाने वाला है. वे कहती हैं, एक बार ऐसा हुआ कि एक मरीज का चेहरा गहरा जख्मी था. जैसे ही हम उसे स्टिच लगा रहे थे, वह अचानक उठा और हाथ पैर मारने लगा कहने लगा कि उसे इलाज नहीं कराना. नशे की हालत में वह पूरी तरह सचेत नहीं था. उसके ऐसे व्यवहार से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ दोनों को जोखिम भरा माहौल का सामना करना पड़ता है.

 

रांची और पूरे झारखंड में बढ़ते सड़क हादसों की असली वजह सिर्फ खराब सड़कें नहीं, बल्कि लोगों की लापरवाही है. बिना हेलमेट बाइक चलाना, शराब पीकर गाड़ी दौड़ाना और यातायात नियम तोड़ना आम हो गया है.  नतीजा यह है कि सड़क पर खून बहता है और अस्पतालों में डॉक्टरों को जान बचाने से पहले मरीज के व्यवहार से जूझना पड़ता है.

 

सड़क हादसों को रोकने के लिए सिर्फ जागरूकता अभियान काफी नहीं है. शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी, ट्रैफिक नियमों के पालन को सख्ती से लागू करना होगा और समाज को यह समझाना होगा कि नशे में गाड़ी चलाना सिर्फ अपनी नहीं, दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ है.

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