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झारखंड शिक्षा सेवा में पदस्थापन को लेकर भारी असंतोष, वरीयता क्रम की अनदेखी से नाराज अधिकारी

झारखंड शिक्षा सेवा में हाल ही में हुए पदस्थापन को लेकर भारी असंतोष देखने को मिल रहा है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी (SDEO) और क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी (BEO) जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में पदस्थापन पर भारी अनियमितता बरती गई है.
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Ranchi :  झारखंड शिक्षा सेवा में हाल ही में हुए पदस्थापन को लेकर भारी असंतोष देखने को मिल रहा है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी (SDEO) और क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी (BEO) जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में पदस्थापन पर भारी अनियमितता बरती गई है. 

 

आरोप है कि पदाधिकारियों के वरीयता क्रम की खुले तौर पर अनदेखी की गई है, जिससे सीनियर अधिकारियों को जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करना पड़ रहा है. उदाहरण के तौर पर, जहां  जामताड़ा में सातवें बैच के सुरेश महतो SDEO पद पर हैं, वहीं उनसे कनिष्ठ अधिकारी विकेश प्रजापति DSE पद पर कार्यरत हैं. कोडरमा में कंचन कुमारी BEO हैं, जबकि उनसे नीचे के वरीयता क्रम में आने वाले अविनाश राम DEO पद पर पदस्थ हैं. इस तरह के कई ऐसे मामले समाने आये हैं.

 

छठे बैच के अधिकारी अधीनस्थ, सातवें बैच के अधिकारी सीनियर पदों पर

राज्य में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से चयनित शिक्षा सेवा के अधिकारियों का छठा और सातवां बैच कार्यरत है. सामान्य प्रशासनिक नियमों के अनुसार, पदस्थापन वरीयता के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है. छठे बैच के कई अधिकारी, जहां अनुमंडल या क्षेत्र स्तर पर पदस्थापित हैं. वहीं सातवें बैच के कुछ कनिष्ठ अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी जैसे उच्च पदों पर आसीन हैं.

 

सीनियर को करना पड़ रहा अधीनस्थ के आदेश का पालन

स्थिति यह है कि कई मामलों में सीनियर अधिकारी जूनियर अधिकारियों द्वारा संचालित बैठकों में भाग ले रहे हैं और निर्देशों का पालन कर रहे हैं. यह न केवल प्रशासनिक शिष्टाचार के विरुद्ध है, बल्कि एक सुव्यवस्थित पदानुक्रम को भी चुनौती देता है.

 

अधिकारियों में बढ़ रहा असंतोष, सौंपेंगे ज्ञापन

इन असमानताओं और पदस्थापन संबंधी विसंगतियों को लेकर झारखंड शिक्षा सेवा के अधिकारियों ने आपात बैठक की. बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा. अधिकारी मांग कर रहे हैं कि वरीयताक्रम को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए और उसी आधार पर पारदर्शी पदस्थापन सुनिश्चित किया जाए.

 

वरीयताक्रम न होने से पदस्थापन में अनियमितता

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक विभाग द्वारा स्पष्ट कोटि क्रमांक आधारित वरीयता सूची तैयार नहीं की गई है, जिसके कारण पदस्थापन में निरंतर भ्रम और विवाद की स्थिति बनी हुई है.

 

छठे बैच के प्रमुख अधिकारी जो प्रभावित हैं :

  • - मुकुल राज :  जिला शिक्षा अधीक्षक, गिरिडीह
  • - दीपक राम :  जिला शिक्षा अधीक्षक, सिमडेगा
  • - अभय शील :  जिला शिक्षा अधीक्षक, खूंटी
  • - नयन कुमार :  जिला शिक्षा अधीक्षक, पाकुड़
  • - आशीष हेंब्रम :  जिला शिक्षा अधीक्षक, दुमका
  • - संजीत कुमार :  जिला शिक्षा अधीक्षक, रामगढ़
  • - आकाश कुमार :  जिला शिक्षा अधीक्षक, हजारीबाग
  • - राजेश पासवान :  क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, पश्चिमी सिंहभूम

 

सातवें बैच के कनिष्ठ अधिकारी, जो उच्च पदों पर हैं पदस्थ :

  • सौरभ प्रकाश :  जिला शिक्षा पदाधिकारी, पलामू
  • कैसर रजा :  जिला शिक्षा पदाधिकारी, गढ़वा
  • अभिषेक झा :  जिला शिक्षा पदाधिकारी, धनबाद
  • अविनाश राम :  जिला शिक्षा पदाधिकारी, कोडरमा
  • कंचन कुमारी :  क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, कोडरमा
  • सुरेश महतो :  अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी, जामताड़ा
  • विकेश कुणाल प्रजापति :  जिला शिक्षा अधीक्षक, जामताड़ा

 

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