Ranchi: राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सरकार घिरती नजर आ रही है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उनकी घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीन पर उनका कोई असर नहीं दिख रहा.
पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले बजट सत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के कई बड़े ऐलान किए गए थे, लेकिन अब तक उनमें से अधिकांश योजनाएं शुरू भी नहीं हो सकी हैं. खास तौर पर दिसंबर में की गई उस घोषणा का जिक्र किया गया, जिसमें राजधानी के सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट स्थापित करने और प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को 15 लाख रुपये सहायता देने की बात कही गई थी.
सीपीएम ने कहा कि इस देरी का सीधा असर थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों पर पड़ रहा है. डॉक्टरों के अनुसार बीएमटी के लिए उम्र और शारीरिक स्थिति की एक सीमित अवधि होती है, जिसके बाद इस प्रक्रिया की सफलता की संभावना बेहद कम हो जाती है. ऐसे में विलंब के कारण दर्जनों बच्चों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है.
पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) परिसर में तैयार क्षेत्रीय नेत्र केंद्र का उद्घाटन अब तक क्यों नहीं हो पाया है, जबकि इसकी घोषणा भी काफी पहले की जा चुकी है.
सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि झारखंड की बड़ी आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है, इसलिए इन सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने मांग की कि रिम्स समेत पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त किया जाए और लंबित घोषणाओं को बिना देरी लागू किया जाए.
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा.
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