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लॉकडाउन में पेड़ कटाई: सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, वन अधिकारियों की संलिप्तता से जांच में  हुई देरी

  • एडीजी सीआईडी व अनुसंधानकर्ता डीएसपी सीआईडी हुए हाजिर

Ranchi: लॉकडाउन (कोविड के दौरान) के समय वर्ष 2020 में झारखंड में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा राज्य के कई जिलों में सैकड़ों पेड़ काट दिए जाने से संबंधित याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई. मामले में कोर्ट के आदेश के आलोक में एडीजी सीआईडी और अनुसंधानकर्ता डीएसपी सीआईडी सशरीर हाजिर हुए. मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में वन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है, इसलिए जांच में देरी हुई है. रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, रेंजर और वन गार्ड व अन्य वन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है. 


2 वन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है. जबकि एक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. कोर्ट को बताया गया कि मामले में दो प्राथमिकी पलामू में दर्ज की गई थी. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. 

 

दरअसल पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पीसीसीएफ और डीजीपी के जवाब पर कड़ी नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि सीआईडी जांच चल रही है,अब तक जांच अधूरी है,  यह अवमानना का मामला बनता है. मौखिक कहा था कि 6 साल तक इसकी जांच चल रही है. कोर्ट ने इसपर पीसीसीएफ और डीजीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, यह संतोषजनक नहीं है. उनके द्वारा केवल पीसीएफ कार्यालय से जंगल काटे जाने से संबंधित कागजात मांगे जाने की बात कही जा रही है. जबकि कोर्ट ने सीआईडी जांच कर त्वरित कार्रवाई करने को कहा था. 

 

जंगल कटाई से संबंधित दस्तावेज नहीं मिलने का बहाना बनाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सीआईडी जांच चल रही है. नाराज कोर्ट ने एडीजी सीआईडी व अनुसंधानकर्ता डीएसपी सीआईडी को दस्तावेज के साथ आज यानी 20 अप्रैल को सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने को कहा था.

 

यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में लॉकडाउन के समय झारखंड के जामताड़ा, पलामू, चाईबासा, रांची आदि जिलों में वन विभाग की ओर से सैकड़ों पेड़ काट दिए गए थे. इन काटे गए पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों में भरकर ले जाया गया था. बाद में थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी,  जिसकी जांच सीआईडी कर रही है.

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