Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में बुनियादी ढांचे और आदिवासी धार्मिक आस्था के बीच का टकराव एक बार फिर खुलकर सड़क पर आ गया है. पिछले वर्ष आज ही के दिन, यानी 5 जून 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जनता को समर्पित किए गए महत्वाकांक्षी सिरमटोली फ्लाईओवर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस फ्लाईओवर के उद्घाटन को आज पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन आदिवासी समाज का गुस्सा और विरोध आज भी उतना ही उग्र है.
आज, 5 जून 2026 को इस उद्घाटन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और इस दिन को काला दिन करार देते हुए अपनी बांहों और चेहरों पर काला पट्टा लगाकर अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन किया.
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2023 से जुड़ी हैं, जब सरकार ने रांची की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सिरमटोली फ्लाईओवर का खाका तैयार किया था. जैसे ही यह बात सामने आई कि इस फ्लाईओवर का एक मुख्य रैंप केंद्रीय सरना स्थल के ठीक सामने से होकर गुजरेगा, पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश की लहर दौड़ गई.
आदिवासियों के भारी विरोध, धरने और प्रदर्शनों के कारण इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य लंबे समय तक अधर में लटका रहा. तमाम विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पिछले साल 5 जून 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भव्य समारोह के बीच इस बहुप्रतीक्षित सिरमटोली फ्लाईओवर का आधिकारिक रूप से उद्घाटन कर दिया. उद्घाटन के बाद इस रूट पर आम जनता और वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बहाल कर दिया गया.
आम जनता के लिए जो फ्लाईओवर राहत का सबब बना, वहीं आदिवासी समाज के लिए उनकी आस्था पर एक बड़ा आघात बन गया. इस मौके पर आदिवासी समाज ने कहा कि केंद्रीय सरना स्थल के सामने से फ्लाईओवर रैंप उतरना सरकार का एक गलत निर्णय था, यह निर्णय आदिवासियों के विरुद्ध लिया गया और उनके भावनाओं को ठेस पहुंचाया गया.
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