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मोदी सरकार में आदिवासी विरासत को मिल रही नई पहचान: आदित्य साहू

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मोदी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाई. साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान और उनके विकास के लिए केन्द्र सरकार की पहल का खूब बखान किया.
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Ranchi: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मोदी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाई. साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान और उनके विकास के लिए केन्द्र सरकार की पहल का खूब बखान किया.

 

आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ ओडिशा के मयूरभंज जिला अंतर्गत पाहाड़पुर गांव स्थित संथाली जाहेर और हो जाहेर स्थल में पूजा अर्चना कर इन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का काम किया है. प्रधानमंत्री का यह कदम भारत की जनजातीय जड़ों, सदियों पुरानी परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके गहरे सम्मान को भी दर्शाता है. 

 

आदित्य ने कहा कि संथाल और हो समुदायों के लिए जाहेर स्थल सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक हैं. आदिवासी समाज में मांझी थान और जाहेर थान स्थलों का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है. संथाल और हो समुदायों के लिए यह स्थल सामुदायिक जीवन का आध्यात्मिक केंद्र होता है. इनकी जीवन पद्धति इसी के इर्द गिर्द केंद्रित होती हैं. इनके सारे मांगलिक कार्य यहीं से संपन्न होते हैं.

 

उन्होंने ने कहा कि भाजपा और नरेंद्र मोदी जनजातीय समाज के उत्थान और इनकी सांस्कृतिक विरासत को संयोजने को लेकर सदैव तत्पर रहे हैं. भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाना, आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों की स्थापना तथा विभिन्न जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना इसी क्रम का हिस्सा है. 

 

द्रौपदी मुर्मू का भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन होना असाधारण उपलब्धि है. आजादी के 75 वर्षों बाद पहली बार किसी आदिवासी महिला का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना करोड़ों आदिवासियों के लिए गौरव का विषय बना. अब झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना भी इसी व्यापक प्रक्रिया का विस्तार है, जिसके तहत आदिवासी नेतृत्व और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज किया जा रहा है.

 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की दिशा में प्रयासरत है. आदिवासियों के आस्था स्थल पर माथा टेककर प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज केवल विकास योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के महत्वपूर्ण वाहक हैं.

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