Ranchi : आदिवासी छात्र संघ ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सेल्फ फाइनेंसिंग कॉमर्स विभाग में चल रही शुल्क व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए. संघ ने बताया कि पहले बी. कॉम और एम. कॉम पाठ्यक्रमों में छात्रों से प्रतिवर्ष शुल्क लिया जाता था, जिसमें 6890 रुपये प्रति वर्ष की राशि निर्धारित थी.
वर्तमान सत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुल्क नीति में अचानक बदलाव करते हुए छात्रों से प्रति सेमेस्टर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है. संघ के अनुसार फर्स्ट सेमेस्टर के लिए 9192 रुपये और सेकंड सेमेस्टर में ‘री-एडमिशन शुल्क’ के नाम पर 6000 रुपये वसूले जा रहे हैं.
छात्र संघ का कहना है कि इस बदलाव से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुल्क को लगभग दोगुना कर दिया है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
आदिवासी छात्र संघ ने कहा कि इस मुद्दे पर एक महीने पहले विरोध प्रदर्शन भी किया गया था, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था. लेकिन एक महीना बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है. संघ का आरोप है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि वे "सिर्फ प्रभार में" हैं, इसलिए कोई निर्णय नहीं ले सकते.
कॉलेज प्रशासन की इस अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए आदिवासी छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द समाधान नहीं निकालते हैं, तो वे विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने पर मजबूर होंगे.



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